ज्ञानपुर। वाणिज्य कर विभाग को उन फर्मों का पता नहीं चल पा रहा है, जिनसे परिषदीय स्कूलों में बच्चों के लिए स्वेटरें खरीदी गईं। विभाग की जांच में मिलने वाली फर्में स्वेटरों की बिक्री से सीधे इंकार कर रही हैं। ऐसे में मामला पेचीदा होता जा रहा है। शासन से पहली किस्त के रूप में स्वेटर खरीद के लिए एक करोड़ 33 लाख रूपये भेजा है। हालांकि खामियों को देखते हुए भुुगतान पर संकट मड़राने लगा है।
प्राथमिक एवं पूर्व माध्यमिक विद्यालयों में पढ़ने वाले बच्चों को ठंड से बचने के लिए अगस्त-सितंबर में स्वेटर का वितरण किया गया। इसके लिए शासन से 200 रुपये प्रति बच्चे के लिए स्वेटर खरीद की रकम तय की गई थी। बजट नहीं होने के बाद भी वित्तीय वर्ष 2018-19 में पंजीकृत करीब एक लाख 47 हजार बच्चों को विभिन्न फर्मों ने स्वेटर का वितरण किया। स्वेटर बंटने के बाद से ही उसके मानक एवं खरीद को लेकर सवाल उठने लगे। मामले की शिकायत मिलने पर सीडीओ हरिशंकर सिंह ने दो अधिकारियों की टीम जांच के लिए गठित की। जिसमें सहायक वाणिज्यकर आयुक्त और बेसिक शिक्षा अधिकारी को नामित किया। बेसिक विभाग की ओर से दी गई सूची के आधार पर वाणिज्यकर विभाग ने जांच की तो गोलमाल की पोल खुलने लगी। जांच में जिन फर्मों की ओर से वितरण दिखाया गया है वह वितरण से इंकार कर रहीं है। इनमें जेएमडीव एडवाइजर रामलीला मैदान गोपीगंज, अभिषेक इंटर प्राइजेज धनवतिया, कमला इंटरप्राइजेज जयरामपुर समेत 15 फर्म स्वेटर वितरण से अनजान बन रही हैं। सहायक आयुक्त वाणिज्यकर संजय सिंह ने कहा कि जांच में लाभांश 10 से 15 प्रतिशत के बजाए 30 से 40 प्रतिशत लिया गया है। 200 के स्थान पर 120 से 125 रूपये का स्वेटर बच्चों में बांटा गया है, हालांकि फर्मे वितरण से इंकार कर रही है। जांच रिपोर्ट सीडीओ को भेजा जा चुका है। वहीं दूसरी ओर बजट आने के बाद प्रथम किश्त के रूप में 91-91 रुपये के हिसाब से पैसा प्रधानाध्यापकों के खाते में भेजा जा चुका है लेकिन अब यह यक्ष प्रश्न है कि जिन फर्मों ने खरीद और बिक्री से इंकार कर रही हैं उनको भुगतान कैसे होगा।
जिला बेसिक शिक्षा अधिकारी अमित कुमार ने कहा कि वाणिज्यकर अधिकारी को फर्मो की सूची दी गई है। उच्चाधिकारियों के दिशा-निर्देश पर कार्य होगा।