ज्ञानपुर। उत्तम संस्कारों से ही मानवीय और आध्यात्मिक विकास हो सकता है। संस्कारों के अनुरूप ही मनुष्य अपना और समाज का चरित्र चित्रण करता है। इसलिए उत्तम संस्कार मनुष्य का सबसे बड़ा गुण है। रोवर्स-रेंजर्स प्रशिक्षण के तीसरे दिन आयोजित शैक्षिक उन्नयन गोष्ठी में यह बातें केएनपीजी कॉलेज के प्राचार्य डॉ. पीएन डोंगरे ने कही।
काशी नरेश राजकीय स्नातकोत्तर महाविद्यालय में पांच दिवसीय रोवर्स-रेंजर्स प्रशिक्षण कार्यक्रम चल रहा है। जिसके तहत बुधवार को शैक्षिक उन्नयन गोष्ठी का आयोजन किया गया। इसमें महाविद्यालय के छात्र-छात्राओं को समाज, राष्ट्र और जाति के संस्कारों के बारे में विस्तार से बताया गया। राजनीति विज्ञान विभाग के पूर्व विभागाध्यक्ष डॉ. डीएन सिंह ने कहा की समाज और राष्ट्र के उदांत संस्कारों के पुंज का नाम संस्कृति है। रेंजर्स प्रभारी डॉ. रश्मि सिंह ने कहा की मनुष्य को सुसंस्कृत बनाने का विधान और विज्ञान ही संस्कृत है। कार्यक्रम का संचालन करते हुए रोवर्स प्रभारी डॉ. कमाल अहमद सिद्दीकी ने कहा कि समाज और देश के सामाजिक और अध्यात्मिक विकास के लिए सांस्कृतिक संस्कारों का विकास बेहद महत्वपूर्ण है। इस दौरान रोवर्स-रेंजर्स के छात्र-छात्राओं को बेडेन पवेल द्वारा निर्धारित छह कसरतों को नियमित करने, स्वास्थ्य के नियमों की जानकारी, प्राथमिक चिकित्सा एवं प्राथमिक सहायता बाक्स में रखे जाने वाली सामाग्रियों की जानकारी, हांथ और सीटी के संकेतों की जानकारी दी गई। इस मौके पर शीतला प्रसाद पांडेय, राधा त्रिपाठी, ऋतुराज श्रीवास्तव, डॉ. हेमंत कुमार, डॉ. सुमन गुप्ता, डॉ. प्रकाशचंद्र, डॉ. रमेशचंद्र, डॉ. विनोद कुमार आदि मौजूद रहे।