सीतामढ़ी। संत डॉ. दुर्गेशाचार्य जी महराज ने कहा कि भागवत कथा जीवात्मा और परमात्मा का मिलन है। जब मन, बुद्धि और चित्त के भाव-विचार और संस्कार पवित्र हो जाते हैं तो इंद्रियों का समूह गोकुल रूपी शरीर वृंदावन धाम बनकर परमात्मा की अनंत लीलाओं के रसपान का अधिकारी बनता है।
कोइरौना के दुलही की बारी गांव में आयोजित श्रीमद्भागवत कथा के अंतिम दिन कथावाचक स्वामी दुर्गेशाचार्य जी के भागवत कथा के अमृतमयी रस में श्रद्धालु तरबतर हो गए। सुदामा चरित्र, तुलसी वर्षा और सहस्त्र धारा रसपान की मनोहारी कथा सुनाकर उन्होंने श्रद्धालुओं को मंत्रमुग्ध कर दिया। सुदामा चरित्र का वर्णन सुन श्रद्धालु भावविभोर हो गए। स्वामी जी ने कहा कि सुदामा जीवात्मा है और श्री कृष्ण परमात्मा। जीवात्मा और परमात्मा का मिलन ही भागवत है। कहा कि आज घर का पर्यावरण बिगड़ गया है। युवा नशे का शिकार होता जा रहा है और माता पिता आश्रमों की ओर भाग रहे हैं। बच्चों को संस्कारित कर घर परिवार का पर्यावरण एवं प्राकृतिक पर्यावरण को बचाना ही श्रीकृष्ण का संदेश है। भगवान श्री कृष्ण साधारण गोपियों और सुदामा जैसे गरीबों को हृदय से लगा कर अपने सिंहासन पर विराजमान करते हैं। आज के राजा, महाराजा और राजनेता भी गरीबों को प्रश्रय देने में श्री कृष्ण जैसी सच्ची मित्रता जीवन में उतारें तो धरती पर कोई दीन, दु:खी, निर्धन नहीं रहेगा और तभी सच्चे रामराज्य की स्थापना होगी। इस मौके पर श्यामधर मिश्रा, वंशनारायण मिश्रा, कलेक्टर पंडित, विंध्यवासिनी मिश्रा, वकील दुबे, दिनेश मिश्रा आदि रहे।