सरपतहां में निर्माणाधीन 100 शैय्या अस्पताल। संवाद
- फोटो : BHADOHI
ज्ञानपुर। सरपतहां में निर्माणाधीन 100 शैय्या का अस्पताल फिर सुर्खियों में है। अब ओपीडी संचालन को लेकर झोल सामने आया है। निर्माण से लेकर संचालन तक अस्पताल घोटाले की जद में आ चुका है। 2008 में 14 करोड़ की लागत से आधारशिला रखी गई थी। 14 साल बाद लागत भी चार करोड़ बढ़ गई, लेकिन अस्पताल का काम पूरा नहीं हो सका। वर्ष 2008 में बसपा सरकार के दौरान जिला मुख्यालय के सामने 14 करोड़ की लागत से 100 शैय्या अस्पताल के निर्माण की स्वीकृति मिली थी। कार्यदायी संस्था राजकीय निर्माण निगम को नामित किया गया था। कार्यदायी संस्था ने छह से सात ठेकेदार बदले लेकिन 14 साल बाद भी अस्पताल का काम पूरा नहीं हो सका। 2015 में तत्कालीन जिलाधिकारी अमृत त्रिपाठी ने निर्माणाधीन अस्पताल की जांच कराई। उस दौरान करीब आठ करोड़ 33 लाख की घपलेबाजी सामने आई। उस दौरान कार्यदायी संस्था के तत्कालीन परियोजना प्रबंधक गिरजाशंकर दीक्षित, ठेकेदार रामकुमार सिंह, हंसराज सिंह, मुंशी सिंह के खिलाफ धारा 406, 409 के तहत मुकदमा दर्ज कराया था। जिन धाराओं में मुकदमा दर्ज किया गया है, उनमें सरकारी धन का गबन और आपराधिक न्यास भंग करना प्रमुख है। मामले में परियोजना प्रबंधक को जेल भी जाना पड़ा। 14 करोड़ की लागत वाले अस्पताल पर अब तक 18 करोड़ से अधिक की रकम खर्च हो चुकी है, लेकिन अस्पताल अब तक आम जन के लिए नहीं चालू हो सका है। विशेष सचिव स्वास्थ्य विभाग की संस्तुति पर गृह विभाग ने जांच के लिए एसआईटी को जिम्मेदारी सौंपी। जांच भी पूर्ण हो चुकी है। छह माह पूर्व अस्पताल की ओपीडी भी शुरू की गई, लेकिन वह कागजों तक सिमटकर रह गई। सांसद रमेश चंद्र बिंद ने अस्पताल की जांच की तो पोल खुली। ऐसे में छह महीने तक चिकित्सक से लेकर कर्मचारियों के वेतन आदि किस आधार पर दिए गए, यह जांच का विषय है।
---
भवन होने लगे जर्जर
ज्ञानपुर। अस्पताल के जो भवन बनकर तैयार हैं, वे भी ख़राब होने लगा है। खिड़कियां टूट रही हैं, तमाम सामान जो अस्पताल के लिए मंगाए गए थे, खराब हो रहे हैं। ऐसे में आम जन को सहूलियत के लिए बनने वाला अस्पताल खुद ही बीमार होने लगा है।
---
कई ठेकेदार पहन चुके हैं राजनीति का चोला
ज्ञानपुर। अस्पताल के निर्माण में हाथ आजमाने वाले कई ठेकेदार राजनीति का चोला पहन चुके हैं। घोटाले की आंच उन तक भी पहुंची, लेकिन राजनीतिक दलों से जुड़े होने का लाभ उनको मिल रहा है। यही कारण है कि न तो उनके तक कोई जांच एजेंसी पहुंची और न ही पुलिसिया कार्रवाई हो सकी।
---