जिले के परियावली गांव का ताजिया निकालने को लेकर पैदा हुए विवाद ने रविवार देर रात्रि बवाल करा दिया। पुलिस और प्रशासनिक अधिकारियों पर हुए पथराव में एडीएम, एसडीएम,लेखपालों समेत दस पुलिसकर्मी घायल हो गए।
हिंसा की सूचना पर डीआईजी ओंकार सिंह भी देर रात्रि संभल पहुंच गए। उधर तनाव के चलते संभल, सरायतरीन में ताजिए रोक दिए गए। तनावपूर्ण स्थिति के बीच पूर्व सांसद शफीकुर्ररहमान बर्क व शाही जामा मस्जिद के सदर चौधरी अशरफ अली और जिला प्रशासन के बीच आधा घंटे वार्ता हुई। इसके बाद गतिरोध दूर हुआ और रुके ताजिए 16 घंटे बाद आगे बढ़े।
मालूम हो कि रविवार को परियावली गांव में ताजिया निकालने को लेकर नई परंपरा कायम करने के मुद्दे पर प्रशासन और ताजिएदारों में टकराव और तनाव का माहौल बन गया था। पुलिस को भीड़ को तितर-बितर करने को लाठियां फटकारनी पड़ी। ताजिएदारों ने ताजिए को मौके पर ही रोक दिए थे।
परियावली में प्रशासन के साथ कई दौर की वार्ताओं के बाद दोपहर से रुके हुए ताजिया देर शाम संभल की ओर से जाने पर सहमति बनी। ताजिया आगे बढ़ा लेकिन शाम सात बजे उसे नाहरठेर में रोक दिया। पूरे जिले की फोर्स मौजूद थी। एसपी, डीएम, एडीएम, एएसपी, एडीएम-सीओ समेत कई अधिकारी मौके पर मुस्तैद थे। वार्ताओं का दौर चल रहा था।
मामला नहीं निबटा तो लेखपालों और सिपाहियों के जरिए प्रशासन ने ताजिए के ट्रैक्टर ट्राली को संभल की ओर बढ़वाया। चंद कदम ही ट्रैक्टर ट्राली आगे बढ़ा तो पुलिस और प्रशासनिक अधिकारियों पर पथराव हो गया। बवाल के दौरान कुछ फायर भी हुए हैं हालांकि प्रशासन ने फायरिंग से इनकार किया है।
पथराव में संभल के एडीएम, एसडीएम, पुलिसकर्मियों और लेखपालों समेत कुल दस लोग घायल हुए हैं। एसपी की गाड़ी क्षतिग्रस्त हुई। कई वाहनों में तोड़फोड़ हुई। रोडवेज की दो बसों में तोड़फोड़ की गई। देर रात्रि वार्ताओं के बाद 16 घंटे बाद ताजिए आगे बढ़े।