कलवारी। कुदरहा क्षेत्र के कोरमा गांव में नौ दिवसीय संगीतमय श्रीमद्भागवत कथा के चौथे दिन रविवार को वाराणसी से आए भागवत कथा मर्मज्ञ पंडित प्रहलादाचार्य ने भगवान श्रीकृष्ण जन्म की कथा सुनाई। कहा कि जब-जब पृथ्वी पर धर्म की हानि हुई है, तब-तब भगवान धरती पर किसी न किसी रूप में अवतरित हुए हैं।
प्रहलादाचार्य ने बताया कि भगवान श्रीकृष्ण ने अपने भक्तों का उद्धार और पृथ्वी को दैत्य शक्तियों से मुक्त कराने के लिए अवतार लिया। उन्होंने कहा कि जब अत्याचारी कंस के पापों का बोझ पृथ्वी सहन नहीं कर पा रही थी और पापों से धरती डोलने लगी थी, तब सभी देवता ब्रह्माजी और शिव के साथ क्षीर सागर में भगवान की स्तुति करने लगे। इस पर भगवान श्री हरि ने प्रसन्न होकर देवताओं को बताया कि वे वासुदेव और देवकी के घर कृष्ण रूप में जन्म लेंगे और वृंदावन में मां यशोदा और नंदबाबा के घर बाल लीलाएं करेंगे। प्रहलादाचार्य ने आगे बताया कि सात संतानों के बाद जब देवकी गर्भवती हुई, तो उसे अपने संतान की मृत्यु का भय सता रहा था, लेकिन भगवान की लीला के अनुसार जन्म लेते ही जेल के सभी बंधन टूट गए और भगवान श्रीकृष्ण गोकुल पहुंच गए। कथा के दौरान संजय ओझा, भारत भूषण ओझा, हीरालाल ओझा, आचार्य शुभम त्रिपाठी, मुरलीधर दूबे, विशाल ओझा, राजाराम चौरसिया, राम ध्यान चौरसिया, हरिश्चंद्र राजभर, हरीराम शर्मा सहित अनेक श्रद्धालु उपस्थित रहे। संवाद