परिषदीय स्कूलों में शिक्षा की गुणवत्ता और शिक्षकों की कार्यशैली में सुधार लाने के लिए शासन, प्रशासन और विभाग के किए जा रहे प्रयास पर पानी फिरता नजर आ रहा है। इसकी जानकारी बहादुरपुर ब्लॉक क्षेत्र में एक साथ एक दिन में कराए गए 73 प्राइमरी और जूनियर स्कूलों के निरीक्षण में हुआ। 14 खंड शिक्षा अधिकारियों ने बीएसए को जो निरीक्षण रिपोर्ट दी है, उसके अधिकारी सकते में हैं। सबसे खराब स्थित शिक्षकों के बिना किसी सूचना के स्कूलों से नदारत रहने का रहा। 21 स्कूलों के शिक्षक बिना किसी अवकाश के गायब मिले। एक स्कूल में तो तीन शिक्षक पढ़ाने के बजाए आपस में गप्प लड़ाते मिले। छह स्कूलों के बच्चों को भोजन, दूध और फल तीनों नहीं मिला। एक स्कूल में बच्चों की संख्या शून्य तो दो स्कूलों में दो दो बच्चे मिले। एक स्कूल में तो चार महीने से बच्चों को भोजन नहीं मिला। नामांकन के सापेक्ष मात्र 25 फीसदी ही बच्चे मौजूद मिले। बीएसए मनिराम सिंह ने बताया कि रिपोर्ट की समीक्षा की जा रही है, उसके बाद कार्रवाई की जाएगी। बताया कि इस तरह का अभियान एक साथ अन्य ब्लाकों के स्कूलों में भी चलेगा।
शासन और प्रशासन के लिए शिक्षा की गुणवत्ता और शिक्षकों की कार्यशैली में सुधार लाने की सारी योजनाएं फ्लाप हो रही है। एक खंड शिक्षा अधिकारी का कहना है कि शिक्षक सुधरने के लिए तैयार नहीं हैं। बताया कि अधिकतर उन स्कूलों की दशा दयनीय जहां पर शिक्षक नेता तैनात है। बताया कि जब तक विभाग अनियमित शिक्षक नेताओं के विरुद्घ कड़ी कार्रवाई नहीं करेगा तब तक न तो शिक्षा की गुणवत्ता में सुधार हो सकता है, और न शिक्षक ही सुधर सकते हैं। एक अन्य खंड शिक्षा अधिकारी ने बताया कि विभाग उनके रिपोर्ट पर कार्रवाई नहीं करता जिसके चलते शिक्षक और बेलाम होते जा रहे हैं। बताया कि कार्रवाई न होने से खंड शिक्षा अधिकारी कमजोर होते जा रहे हें। शिक्षकों पर से उनका नियंत्रण समाप्त होता जा रहा है। निरीक्षण में जिन स्कूलों की सबसे खराब स्थित पाई गई, उनमें कन्या पूर्व माध्यमिक विद्यालय बहादुरपुर का रहा है, यहां पर तीन महिला शिक्षक बच्चों को पढ़ाने के बजाए आपस में गप्प लड़ाती मिली। यहां पर तीन शिक्षकां पर 31 बच्चों को पढ़ाने का जिम्मा है। मौके पर मात्र पांच बच्चे ही मिले। यही हाल प्राथमिक विद्यालय जुआजाता का रहा। यहां पर एक भी बच्चा नहीं मिला। जबकि नामांकित बच्चों की संख्या 45 है। इस स्कूल के बच्चों को तीन महीने से दोपहर का भोजन, दूध और फल नहीं मिला। इसके अतिरिक्त जूनियर स्कूल धौरहरा, प्राइमरी स्कूल पाल्हा, जूनियर स्कूल हथिया, प्राइमरी स्कूल हथिया उपाध्याय में भी बच्चों को फल, दूध और भोजन नहीं मिला। इसी तरह 28 स्कूलों में बच्चों को दूध, 22 में मौसमी फल और नौ स्कूलों में दोपहर का भोजन नहीं मिला पाया गया।
इन स्कूलों के शिक्षक रहे गायब
प्राइमरी स्कूल कन्हौली, प्राइमरी स्कूल मुस्तफाबाद, सेमरा पूरे प्रसाद, डारीडीहा, जूनियर स्कूल कुसौरा, प्राइमरी बेनीपुर, जूनियर कलवारी, जूनियर स्कूल धौरहरा में दो शिक्षक, रजली, प्राइमरी जुआजाता, सपहा, भेलवल, जूनियर और प्राइमरी स्कूल खडौवाजाट में दो दो शिक्षक, पोखरनी, पगार एवं प्राइमरी स्कूल दयालपुर में एक शिक्षक सहित कुल 21 शिक्षक बिना किसी अवकाश या सूचना के गायब रहे।