विद्यालय परिसर में भरा पानी। संवाद
बस्ती। ग्रीष्मावकाश खत्म हुए 20 दिन बीत चुके हैं मगर परिषदीय स्कूलों में शैक्षिक गतिविधियां अभी पटरी पर नहीं लौट सकी है। बीएसए भवन के बगल में संचालित कंपोजिट विद्यालय इसका उदाहरण है।
विद्यालय के भवन के कुछ हिस्से में रंग-रोगन हुआ है, शेष भवन, शौचालय से लेकर परिसर तक बदइंतजामी की भेंट चढ़ गया है। परिसर में जगह-जगह पानी पसरा है और चारों तरफ झाड़ियों की भरमार है। इन्हीं दुश्वारियों का सामना करते हुए बच्चे-शिक्षक स्कूल पहुंच रहे हैं।
जबकि शहर के गांधीनगर मुख्य मार्ग पर बीएसए भवन के पास एक एकड़ से अधिक खाली भूमि है। अंग्रेजी हुकूमत की बनी बिल्डिंग निष्प्रयोज्य घोषित हो चुकी है। इसके दक्षिण तरफ 10 साल पहले बीएसए कार्यालय के लिए नया भवन बनाया गया है। बीएसए और कुछ कर्मचारी इसी भवन में बैठते हैं। जबकि पुराने भवन के कुछ हिस्से में नगर क्षेत्र कार्यालय एवं समग्र शिक्षा के कुछ अनुभाग संचालित हो रहे हैं। बीएसए कार्यालय के नए भवन के ठीक पीछे संचालित कंपोजिट विद्यालय का रास्ता पुराने बिल्डिंग की तरफ से है। जबकि नई बिल्डिंग के मुख्य द्वार को बंद रखा जाता है। बच्चे जिस पुराने भवन के बगल से स्कूल आ-जा रहे हैं वहां बारिश का पानी एकत्र हो गया है।
उन्हें पानी के बीच से होकर आना जाना पड़ रहा है। बच्चों का कहना है कि बीएसए कार्यालय की तरफ से रास्ता ठीक है लेकिन अधिकारी उसे बंद रखने के निर्देश दिया है।
विद्यालय में पानी पीने के लिए नल भी नहीं : राजकीय आदर्श कंपोजिट विद्यालय नगर क्षेत्र में बच्चों के पीने के लिए पानी का भी इंतजाम नहीं है। परिसर में लगा इंडिया मार्क हैंडपंप काफी दिनों से खराब है।
अब यहां नल के आसपास ईंट के रोड़े डंप कर दिए गए हैं। शिक्षक अपने लिए घर से पानी लेकर आते हैं। जबकि बच्चों को पानी पीने के लिए परिसर से बाहर जाना पड़ता है।