विक्रमजोत ब्लॉक के पकड़ी संग्राम गांव के पास कटान करती सरयू संवाद
बस्ती। सरयू नदी का जलस्तर लगातार घट रहा है। केंद्रीय जल आयोग, अयोध्या के अनुसार शुक्रवार शाम पांच बजे नदी का जलस्तर 92.31 मीटर दर्ज किया गया, जो खतरे के निशान 92.73 मीटर से 42 सेंटीमीटर नीचे है। जलस्तर घटने के साथ तटबंधों पर पानी का दबाव कम हुआ है, लेकिन नदी किनारे कटान का खतरा बढ़ गया है। विक्रमजोत क्षेत्र में नदी खेती और आबादी की जमीन को निशाना बना रही है। दुबौलिया के सुविकाबाबू गांव के चारों ओर पानी कम होने के बाद वहां ग्रामीणों के लिए लगाए गए मोटरबोट हटा दिए गए हैं। हालांकि, जिन स्थानों पर अब भी पानी भरा है, वहां नाव उपलब्ध है। किसान नाव के सहारे खेतों तक पहुंचकर खेती-किसानी से जुड़े काम कर रहे हैं। बाढ़ के बाद घरों के आसपास बने गड्ढों और अन्य स्थानों पर जलभराव है। इससे संक्रामक रोग फैलने का खतरा बना हुआ है। पानी में खरपतवार सड़ने से दुर्गंध उठ रही है, जिससे ग्रामीणों को परेशानी हो रही है। कुदरहा क्षेत्र में कलवारी-रामपुर तटबंध के दक्षिण दिशा में बसे मईपुर, महुआपार कला, बैडारी एहतमाली, टेंगरिया राजा समेत कई गांवों में भी दुश्वारियां कम नहीं हुई हैं। तटबंध के आसपास बने मकानों के करीब से अभी सरयू बह रही है। इससे किनारों पर कटान का खतरा बना हुआ है।
कटान की दहशत में कट रही रात : विक्रमजोत। सरयू का जलस्तर रुक-रुककर कम हो रहा है। इसके बावजूद नदी किनारे बसे गांवों के लोगों की रात कटान और बाढ़ की आशंका के बीच गुजर रही है। अपस्ट्रीम में जलस्तर घटने के कारण नदी का पानी अभी और कम होने की संभावना जताई जा रही है। जलस्तर घटने के साथ विक्रमजोत के बीडी तटबंध के आपदा प्रभावित गांवों दुधौरा, अर्जुनपुर, अशोकपुर, लकड़ी पांडेय, पकड़ी संग्राम, पूरे चेतन और शंभूपुर के आसपास कटान जारी है। नदी रुक-रुककर खेती और आबादी की जमीन को निशाना बना रही है।
ग्रामीणों के मुताबिक जलस्तर कम होने पर किनारों की मिट्टी खिसक रही है, जिससे कटान का खतरा बढ़ गया है। ग्रामीणों ने प्रशासन से संवेदनशील स्थानों पर निगरानी बढ़ाने और कटान रोकने के लिए प्रभावी इंतजाम करने की मांग की है।