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Basti News: 14 पंचायतों में वर्मी कंपोस्ट यूनिट की होगी स्थापना

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दुबौलिया ब्लॉक के मसहा में पंचायतीराज विभाग की ओर से बनी यूनिट संवाद
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बस्ती। मृदा में जीवाश्म कार्बन की लगातार हो रही कमी को दूर करने के लिए पंचायतीराज विभाग भी सक्रिय हुआ है। विभाग जिले के प्रत्येक ब्लॉक में पहले चरण में एक-एक वर्मी कंपोस्ट यूनिट की स्थापना कराएगा। इसके बाद हर गांव में वर्मी कंपोस्ट यूनिट स्थापित कराने की योजना है। इससे न सिर्फ कंपोस्ट खाद बनाने में मदद मिलेगी, बल्कि किसानों की फसल अवशेषों को जलाने की प्रवृत्ति पर भी रोक लग सकेगी।
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फसलों में रासायनिक उर्वरकों का उपयोग बढ़ने से जहां भूमि की सेहत खराब हो रही है, वहीं इसका कुप्रभाव मृदा की संरचना पर भी पड़ रहा है। भूमि में जीवाश्म कार्बन की कमी को दूर करने के लिए जनपद के 1187 गांवों में एक-एक वर्मी कंपोस्ट यूनिट की स्थापना कराई जाएगी, यह दूसरे चरण में होगा। अभी 14 ब्लॉकों में एक-एक यूनिट लगेगी। इन यूनिटों में किसान कंपोस्ट खाद का उत्पादन कर अपनी भूमि में जीवाश्म कार्बन की कमी को दूर कर सकता है।
जिला कार्यक्रम समन्वयक स्वच्छ भारत मिशन ग्रामीण राजाशेर सिंह ने बताया कि पहले चरण में प्रत्येक ब्लॉकों में से एक-एक गांव का चयन हुआ है। यहां ग्राम निधि के बजट से 30 हजार रुपये खर्च कर यूनिट की स्थापना कराई जा रही है। 14 यूनिट पर करीब चार लाख रुपये खर्च किए जाएंगे। अभी दुबौलिया ब्लॉक के मसहा ग्राम पंचायत में यूनिट बनी है। यहां ट्रायल शुरू हो गया है।
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शेष 13 यूनिट पर कार्य प्रारंभ होना है। सभी चौदह ब्लॉकों में 14 सचिवों की देखरेख में यह कार्य हो रहा है। बताया गया कि इसमें 43 गोसेवक लगे हुए हैं। स्थानीय गांव में 1521 गोवंश हैं। यहां के गोबर से वर्मी कंपोस्ट खाद बनेगी और फिर किसानों को 10 रुपये किलो की दर से देंगे। पैसा ग्राम निधि के खाते में जमा होगा।
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कृषि व उद्यान विभाग भी वर्मी कंपोस्ट यूनिट पर दे रहा अनुदान
कृषि और उद्यान विभाग में भी यह योजना चल रही है। विभाग एक यूनिट की स्थापना के लिए लागत का 75 प्रतिशत धनराशि अनुदान के रूप में देगा, बाकी 25 फीसदी लागत किसान को स्वयं वहन करनी होगी। लाभार्थी किसान के पास कम से कम एक एकड़ भूमि का होना अनिवार्य है। उप कृषि निदेशक अशोक कुमार ने बताया कि जिले में सभी गांवों में एक एक वर्मी कंपोस्ट यूनिट की स्थापना कराई जाएगी। इसके लिए किसानों को 75 प्रतिशत अनुदान दिया जाएगा। इससे किसानों का कंपोस्ट खाद के प्रति रुझान बढे़गा। वहीं, जिला उद्यान अधिकारी अरुण कुमार तिवारी ने बताया कि विभाग में लक्ष्य के अनुसार यूनिट लगाई लगाई जाएगी।
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वर्मी कंपोस्ट खाद के लाभ
- पशुओं के मल मूत्र, फसल अवशेषों का अनकूलतम प्रयोग।
- खेतों में जीवाश्म कार्बन की कमी दूूर होगी, उर्वरा शक्ति मजबूत होगी।
- लाभदायक सूक्ष्म जीवाणुओं को क्रियाशील कर भूमि के जैविक गुणों में सुधार होगा।
- मृदा स्वास्थ्य सुधारने के साथ ही पर्यावरण का संरक्षण।
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एक यूनिट से निकलेगी डेढ़ क्विंटल जैविक खाद
वर्मी कंपोस्ट यूनिट से तीन माह यानी की 90 दिन में एक यूनिट से डेढ़ क्विंटल जैविक खाद बनेगी। यह खाद किसान गांव के यूनिट से प्राप्त कर सकेंगे, इसके लिए उन्हें प्रति किलो 10 रुपये देने होंगे। सचिव की देखरेख में खाद बिकेगी। साथ ही किसान इसमें गोबर देकर खाद बनवा सकेंगे।
कोट
चालू सत्र में सेमरा उर्फ गलवा, सिरौता, कोइलपुरा, मसहा, कठौतिया साउडीह, जोगपुर, मेढ़ौवा, शिवपुर, नारायनपुर, मझारी, बजहा, आमा थर्ड, मझौआ जगत, रूपगढ़ में यूनिट बनेगी, मसहा में प्रारंभ है।
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-घनश्याम सागर, डीपीआरओ, बस्ती।
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