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Basti News: थमी नहीं यूरिया की कालाबाजारी...पैतरा बदला

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खाद की दुकान पर निरीक्षण करते जिला कृ​षि अ​धिकारी डॉ. बाबू राम मौर्य।
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बस्ती। शासन-प्रशासन की सख्ती के बाद भी यूरिया की कालाबाजारी थम नहीं रही हैं। धंधेबाज हर बार पैतरा बदल दे रहे हैं। जानकारों का कहना है यूरिया निजी क्षेत्र के दुकान और सहकारी समितियों से अनुदानित मूल्य वाली यूरिया सेटिंग के जरिये लेकर सुदूर ग्रामीण क्षेत्रों में इसकी खपत की जा रही है।
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धंधेबाजों का नेटवर्क सरकारी, गैर सरकारी गोदामों से लेकर गैर लाइसेंसी विक्रेताओं तक फैला हुआ है। लोकल स्तर पर बिक्री करने पर प्रति बोरी यूरिया में दो सौ से तीन सौ रुपये तक मुनाफा कमाया जा रहा है। विश्वस्त सूत्र बताते हैं कि धंधेबाज निजी क्षेत्र की दुकानों और सहकारी समितियों से सेटिंग करके पीओएस मशीन में किसानों के नाम जरूरत से ज्यादा यूरिया की निकासी करा ली जा रही है।
बाद में यह खेप सुदूर गांवों में प्राइवेट लोगों के पास पहुंचा दिया जा रहा है। जिनके यहां से स्थानीय किसानों में मुंहमांगी रकम पर यूरिया बेच दी जा रही है। जानकार बताते हैं कि धंधेबाजों का एक नेटवर्क नेपाल से भी जुड़ा हुआ है। 267 रुपये प्रति बोरी अनुदानित यूरिया 400 रुपये तक लेकर नेपाल बार्डर पर पहुंचा दिया जा रहा है। वहां से कैरियर बनकर लोग साइकिल और मोटरसाइकिल से गांवों के रास्ते यूरिया को सीमा पार पहुंचा रहे हैं।
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बताया जा रहा है कि अनुदानित मूल्य की यूरिया नेपाल में डेढ़ हजार से दो हजार रुपये बोरी बिक जा रही है। खरीफ सीजन में बड़े पैमाने पर अनुदानित यूरिया की कालाबाजारी कर नकली लिक्विड यूरिया की फैक्टरियों में आपूर्ति का खुलासा हुआ था। इसके बाद धंधेबाजों ने पैतरा बदल दिया है।
समितियों और दुकानों पर लाइन लगाने से अच्छा प्रति बोरी दो सौ से तीन सौ रुपये तक ज्यादा रुपये देकर यूरिया लेना सुदूरवर्ती किसानों को आसान पड़ रहा है।
इसीलिए सुदूर ग्रामीण क्षेत्र में धंधेबाजों के एजेंट बिना लाइसेंस के यूरिया की बिक्री कर रहे हैं। बताया जा रहा है कि इनके एजेंट अपने घरों से ही स्थानीय काश्तकारों को दोगुने मुनाफे पर यूरिया उपलब्ध करा दे रहे हैं। इस नेटवर्क का खुलासा अभी नहीं हो पाया है।
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