बस्ती। केंद्र सरकार की महत्वाकांक्षी प्रधानमंत्री मातृ वंदना योजना (पीएमवीवाई) में सेंधमारी को अंजाम जालसाजों ने ऐसे ही नहीं दिए, कुछ विभागीय खामियां भी सामने आई हैं। बताया गया कि विभाग में तैनात अधिकांश नई सुपरवाइजर पोर्टल संबंधी कार्यों से अनभिज्ञता जता रही हैं, जिसका फायदा आसानी से बिचौलिए उठाए और विभाग में करीब 96 लाख रुपये के गोलमाल को अंजाम दे दिया है।
विभाग के अनुसार, रुधौली ब्लॉक को ही जालसाजों ने टारगेट किया। यहां पहले बिचौलिए फर्जी दस्तावेज तैयार किए। उसके बाद प्रसूता महिला लाभार्थी की संख्या दिखाकर उनके बैंक खातों में छह हजार रुपये एकमुश्त किश्त की योजना को चुना। जानकारों का कहना है कि इस कार्य को बहुत ही सुनियोजित तरीके से किया गया, लेकिन एक ही माह में 1710 आवेदन के भुगतान पर विभाग को शक हो गया। प्रारंभिक जांच की तो पता चला कि 139.36 प्रतिशत भुगतान हुआ है, जो अन्य ब्लॉकों से कई गुना ज्यादा है।
इसमें करीब एक हजार से अधिक फर्जी प्रसूता महिलाओं के खाते में पैसे ट्रांसफर करवा दिए हैं। सूत्र बताते हैं कि अधिकांश ओटीपी बिचौलिए के पास रहने वाले मोबाइल पर जाती है, इससे वह आसानी से इस खेल को करते चले गए और कर्मचारी भी (अचीवमेंट) अधिक होने पर प्रसन्नता जता रहे थे, लेकिन खेल उजागर होने पर वह हक्का-बक्का हैं। खैर, अब विभाग भी पूरी सतर्कता बरतते हुए आगे की कार्रवाई कर रहा है। इससे कई ब्लॉकों के आवेदन भी अब जांच-परख के बाद आगे बढ़ाए जा रहे हैं। इसके लिए डीपीओ ने सभी सीडीपीओ को विशेष हिदायत दी है
डीपीओ राजेश कुमार ने बताया कि जनपद में जितनी नई सुपरवाइजर कीऑनलाइन ट्रेनिंग इसी माह से सोमवार व मंगलवार इसके लिए दिन निर्धारित है। एप के जरिये निदेशालय स्तर से ट्रेनिंग हो रही है। जबकि रुधाैली ब्लाॅक में कुल सात सुपरवाइजर तैनात हैं इनमें से छह ने सितंबर माह में ज्वाइन किया है।
एक माह में गांव में दिखा दिए 23 बेटियों का जन्म : विभाग की प्रांरभिक जांच में पकड़ में आया है कि रुधौली ब्लॉक के एक-एक गांव में 20 से 23 बेटियों का जन्म सितंबर माह में ही दिखा दिया गया है। चूंकि, दूसरी संतान बेटी होने पर प्रसूता महिलाओं को सीधे छह हजार रुपये प्रोत्साहन के रूप में एकमुश्त प्रदान की जाती है। ऐसे में इसी को जालसाजों ने चुना और केंद्र की अति महत्वाकांक्षी योजना पर सेंधमारी कर डाली है।
चार स्टेप पर आवेदनों को करते हैं अग्रसारित : पीएमवीवाई के लाभ के लिए प्रसूता महिला को अपना पूरा डाक्यूमेंट संबंधित गांव की आंगनबाड़ी को देना होता है। आवेदन में टीकाकरण कार्ड, राशन कार्ड, श्रम कार्ड, आय प्रमाण पत्र और आरसीएच नंबर अनिवार्य होता है। बच्चे के पैदा होने के बाद जन्म प्रमाण पत्र भी मांगा जाता है।
इसके बाद आंगनबाड़ी अपनी लॉगिंग आईडी से फॉर्म को भरकर सुपरवाइजर को अग्रसारित करती हैं। यहां से सीडीपीओ, फिर डीपीओ उसके बाद शासन स्तर पर फाइल स्वीकृत होने पर संबंधित लाभार्थी के खाते में पैसा ट्रांसफर होता है। आंगनबाड़ी को इसके लिए अगल से आईडी दी गई है। लेकिन, यदि कोई बाहरी व्यक्ति आवेदन करेगा तो संबंधित सुपरवाइजर के पास ओटीपी जाता है। वहां से ओटीपी आने पर फाइल आगे बढ़ा दी जाती है।