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तमाम अड़चनों में उलझी अल्ट्रासाउंड की व्यवस्था

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बंद पड़ा अल्ट्रासाउंड कक्ष। - फोटो : amar ujala
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बस्ती। 
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सरकार की मंशा है कि गर्भवती का संस्थागत प्रसव हो। इसकी व्यवस्था भी जिला महिला अस्पताल में चाक-चौबंद हैं मगर इस व्यवस्था के लिए विशेषज्ञ हाथों की कमी दूर होने का नाम नहीं ले रही है। सूबे के स्वास्थ्य मंत्री की समीक्षा से पहले एडी स्वास्थ्य एवं चिकित्सा ने खलीलाबाद से आनन-फानन एक रेडियोलॉजिस्ट की तैनाती कर खानापूरी कर दी, मगर एक दिन बाद ही व्यवस्था में खलल आ गया। इसका कारण संबद्ध विशेषज्ञ की डिग्री है।  
करीब आठ माह से बंद पड़े महिला अस्पताल के अल्ट्रासाउंड की चिंता मंडल और जिले के आला अफसरों को नहीं है। उनकी नींद तब टूटी जब सूबे के स्वास्थ्य मंत्री सिद्धार्थनाथ सिंह ने पिछले महीने यहां की समीक्षा की तिथि दे दी। इसकी भनक लगते ही जिम्मेदार अपर निदेशक चिकित्सा एवं स्वास्थ्य ने आनन-फानन संतकबीरनगर जिले में तैनात रेडियोलॉजिस्ट को यहां संबद्ध कर दिया। सप्ताह भर बाद वे आए जरूर मगर उनकी डिग्री को लेकर अड़चन आ गई।  
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विभागीय जिम्मेदारों की मानें तो सबसे पहली अड़चन उन्हें अभी डिग्री ही नहीं मिली है, दूसरे जिस आगरा मेडिकल कॉलेज से उन्होंने डिप्लोमा इन मेडिकल रेडियो डायग्नोस्टिक का कोर्स किया है वह वास्तव में मेडिकल कौंसिल ऑफ इंडिया में मान्य ही नहीं है। वह मान्य है अथवा नहीं जिम्मेदार जानें, मगर यह संबद्धता किस आधार पर की गई, इसे लेकर बहस शुरू हो गई है।  
फिलहाल, महिला अस्पताल में पांच सौ मरीजों की ओपीडी में सौ से अधिक अल्ट्रासाउंड के मरीज होते हैं, मगर अधिकारियों की खींचतान में यहां अल्ट्रासाउंड पूरी तरह ठप हो गया है और मरीज बाहर अल्ट्रासाउंड कराकर लुट रहे हैं। 

यह है अल्ट्रासाउंड के डॉक्टर का मानक 
सीएमओ डॉ. जेएलएम कुशवाहा कहते हैं कि 14 फरवरी 2014 से पहले पीसीपीएनडीसी यानी प्री कंसेप्सनल प्री डायग्नोस्टिक टेक्निकल अधिनियम के तहत सभी एमबीबीएस और सर्जन अल्ट्रासाउंड कर सकते थे मगर अब ऐसा संभव नहीं है। उक्त संस्था में बगैर रजिस्ट्रेशन कोई भी अल्ट्रासाउंड नहीं कर सकता। यह कानून का उल्लंघन है। 

विधिसम्मत नहीं थी संबद्धता
अल्ट्रासाउंड के नोडल अधिकारी डॉ. सीएल कन्नौजिया ने कहा कि महिला अस्पताल में रेडियोलॉजिस्ट की संबद्धता विधिसम्मत नहीं थी। ऐसे में उनसे काम नहीं लिया जा सकता। उनका रजिस्ट्रेशन भी अभी नहीं है।


उपकेंद्र भवन पर पूर्व प्रधान का कब्जा
बस्ती। 
सरकारी जमीन पर अवैध अतिक्रमण के तो तमाम मामले आते हैं, मगर सरकारी भवन पर कब्जे का मामला यहां उजागर हुआ है। जिले के बहादुरपुर पीएचसी से संबद्ध उपकेंद्र भेलवल के भवन पर पूर्व प्रधान ने कब्जा जमा रखा है। इसका खुलासा बुुधवार को तब हुआ जब अपर सीएमओ डॉ. सीएल कन्नौजिया टीकाकरण की जांच के लिए वहां पहुंचे। पता चला कि भवन से दूर एएनएम टीकाकरण का शिविर लगाए हुए है और भवन में घरेलू उपयोग के सामान रखकर पूर्व प्रधान ने इसे बंद कर रखा है। 
उक्त सेंटर के लिए भवन का निर्माण 2008 में हुआ था। इसके बाद उसे पीएचसी बहादुरपुर को हस्तगत कर दिया गया। बुुधवार को जब टीकाकरण की जांच करने पहुंचे अपर सीएमओ डॉ. सीएल कन्नौजिया भौचक रह गए क्योंकि भवन पर किसी और का कब्जा था और कमरों में आलूू, प्याज व अन्य घरेेलू सामान रखे मिले। पूछताछ के बाद पता चला कि पूर्व प्रधान का भवन पर कब्जा है और टीकाकरण का कार्य एएनएम अन्यत्र करती हैं।   डॉ. सीएल कन्नौजिया ने बताया कि उक्त भवन पर पूछताछ में पता चला है कि 2008 से ही कब्जा है। गांव के पूर्व प्रधान इसे अपनी जमीन बता रहे हैं। रिपोर्ट सीएमओ को दे दी गई है। प्रभारी चिकित्साधिकारी डॉ. पवन कुमार वर्मा ने कहा कि एसीएमओ ने जांच की है। सभी तथ्य उनके संज्ञान में है। जिस जमीन पर सेंटर का निर्माण हुआ है उसे पूर्व प्रधान अपना बताते हैं। इसके लिए वह मुआवजे की मांग कर रहे हैं।
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‘आयुष आपके द्वार’ में 2500 का परीक्षण
बस्ती। आयुुष विभाग और शासन के निर्देश पर ‘आयुष आपके द्वार’ योजना के तहत जिले के विभिन्न आयुष अस्पतालों के डॉक्टरों ने 2500  स्कूली बच्चों का स्वास्थ्य परीक्षण किया। इस दौरान डॉक्टरों ने बच्चों को स्वस्थ रहने के नियम और आहार-विहार के बारे में भी जानकारी दी। शहर के राजकीय आयुर्वेदिक अस्पताल कोर्ट एरिया, पैड़ा खरहरा व महादेवा के डॉक्टरों ने प्राथमिक विद्यालय रजवापुर, अमौली, सांऊघाट, पैड़ा, प्राथमिक विद्यालय पचदेवरी व नेवरी में स्वास्थ्य शिविर आयोजित किया गया। प्रभारी क्षेत्रीय आयुर्वेदिक एवं यूनानी अधिकारी डॉ. विजय कुमार श्रीवास्तव ने बताया कि शिविर में आयुुष डॉक्टरों ने बच्चों के अलावा ग्रामीणों के स्वास्थ्य की भी जांच की। कार्यक्रम के दौरान स्वस्थ रहने के टिप्स भी दिए गए।
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