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वर्ष भर से बंद है महिला अस्पताल का अल्ट्रासाउंड

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इंद अल्ट्रासाउंड कक्ष। - फोटो : amar ujala
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बस्ती। शासन संस्थागत प्रसव पर गंभीर है। गर्भवती को कोई परेशानी न हो इसके लिए तमाम संसाधनों से जिला महिला अस्पताल लैस है। इन्हीं सुविधाओं में अल्ट्रासाउंड भी शामिल है। यह सुविधा मरीजों के लिए फ्री है। हाल यह है कि रेडियोलॉजिस्ट न हो ने कारण वर्ष भर से इस सेंटर पर ताला लटक रहा है। ऐसे में मरीजों का अल्ट्रासाउंड बाहर के भरोसे संचालित हो रहा है। यही नहीं तमाम व्यवस्थागत कमियां भी यहां मरीजों को परेशानी में डालती हैं। 
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समय से नहीं खुलता है पैथालॉजी और पर्ची काउंटर 
महिला अस्पताल में डॉक्टरों और सुविधाओं की कोई कमी नहीं है, मगर व्यवस्थागत खामियों के चलते मरीजों को धक्का खाने के लिए मजबूर होना पड़ता है। शनिवार को यहां दस बजे तक न तो महिला रोग के कोई डॉक्टर ओपीडी में थे और न तो पर्चा काउंटर और पैथालॉजी सेंटर ही खुला था। ऐसे में मरीजों के तीमारदार परेशान रहे। यह स्थिति रोज की है। 

600 रुपये में बाहर का अल्ट्रासाउंड 
गरीबों के स्वास्थ्य सुविधा पर सरकार और शासन का पूरा ध्यान है, मगर यहां जिम्मेदारों ने शासन की मंशा को ताक पर रख दिया है। क्योंकि जो अल्ट्रासाउंड अस्पताल में है वहां फ्री सुविधा दी जाती है, मगर तमाम प्रयास के बाद भी वर्ष भर से सरकारी सेंटर पर ताला लगा है। ऐसे में मरीजों को छह सौ रुपये देकर बाहर से अल्ट्रासाउंड कराना पड़ता है। 
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ब्लडग्रुप, प्रेग्नेंसी और एचआईवी जांच में खेल 
महिला अस्पताल में ब्लड ग्रुप, प्रेग्नेंसी टेस्ट और एचआईवी जांच के लिए फ्री सुविधा है, मगर यहां पहुंचे मरीज के तीमारदार राघव यादव, रामानंद और जैसराम ने आरोप लगाया कि इन जांचों के लिए सौ रुपये तक वसूले जा रहे हैं। 

हर दिन सौ से अधिक अल्ट्रासाउंड 
अस्पताल में हर दिन करीब पांच से सात सौ की ओपीडी है। इनमें करीब सौ मरीजों का अल्ट्रासाउंड हर दिन डॉक्टर लिखते हैं। अस्पताल में यह सुविधा होने के बावजूद इसका संचालन न होने से बाहर स्थित अल्ट्रासाउंड सेंटरों को अनावश्यक रूप से रुपये दिए जा रहे हैं। 

प्रमुख सचिव और मंत्री का आदेश भी बेमतलब 
जिले की नोडल अधिकारी और प्रमुख सचिव रेणुका कुमार करीब चार माह पूर्व तो प्रभारी मंत्री तथा स्वास्थ्य मंत्री सिद्धार्थनाथ सिंह यहां पहुंचे। उन्हें अल्ट्रासाउंड सेंटर पर रेडियोलॉजिस्ट की तैनाती न होने की बात बताई गई। जिम्मेदारों को आदेश-निर्देश भी हुआ, मगर उनके जाने के बाद हालात में कोई तब्दीली नहीं आई। यह अलग बात है कि महिला अस्पताल में सेंटर खाली होने के बाद भी यहां तैनात एक रेडियोलॉजिस्ट दूसरे जिले में स्थानांतरित कर दिया। 

सीएमओ बोले 
सीएमओ डॉ. जेएलएम कुुशवाहा ने कहा कि मैंने अपने स्तर से एडी चिकित्सा एवं स्वास्थ्य को कई बार पत्र लिखा, मगर उसे संज्ञान नहीं लिया गया। फिलहाल, वहां एक वर्ष से रेडियोलॉजिस्ट का पद रिक्त है। यह शासन के भी संज्ञान में है।  
रेडियोलॉजिस्ट को किया गया संबद्ध 
अपर निदेशक चिकित्सा एवं स्वास्थ्य डॉ. पीके शाही कहते हैं कि महिला अस्पताल में एक रेडियोलॉजिस्ट को संबद्ध किया गया है। वह जल्द ही यहां ज्वाइन कर लेंगे। 

दूर की जाएंगी व्यवस्थागत खामियां 
महिला अस्पताल के एसआईसी डॉ. एके सिंह ने कहा कि सभी काउंटर समय से खुल रहे हैं, यदि ऐसा हुआ है तो इसकी जांच करा ली जाएगी। रही तीमारदारों के आरोप की बात तो यदि किसी से भी रुपये लिए जा रहे हैं तो वह शिकायत करे, कार्रवाई होगी।
‘दस्तक’ के लिए कवायद तेज
विक्रमजोत। दस्तक में जेई-एईएस से निपटने के लिए जागरूकता अभियान को लेकर कवायद तेज हो गई है। इसके तहत ब्लॉक मुख्यालय पर प्रधानों, बीडीसी सदस्यों और कर्मियों को स्वास्थ्य विभाग ने बैठक कर अभियान की रूपरेखा का खाका खींचा। अभियान में जेई-एईएस से निपटने के लिए जहां जागरूकता अभियान चलाने की कवायद होगी, वहीं, एक से पंद्रह वर्ष तक के बच्चों के टीकाकरण भी कराए जाएंगे। दो से सोलह अप्रैल तक अभियान संचालित होगा। ब्लॉक मुख्यालय पर आयोजित जागरूकता बैठक में प्रशिक्षक सीएचसी के स्वास्थ्य शिक्षा अधिकारी शुभकरन ने जेई/एईएस के लक्षणों और बचाव के उपाय बताए। इस मौके पर बीडीओ आरएस पांडेय, जेई फारूख अहमद, एडीओ जयशंकर सिंह, आनंदस्वरूप सिंह, नरेंद्र प्रताप नारायण सिंह, कार्यालय प्रभारी मनोज चौहान, मुकेश यादव सहित क्षेत्र पंचायत सदस्य और प्रधान मौजूद रहे।
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