जिला अस्पताल का पीआईसीयू वार्ड संवाद
बस्ती। बारिश के मौसम के साथ एक्यूट इंसेफ्लाइटिस सिंड्रोम (एईएस) का खतरा बढ़ने लगा है। जिला अस्पताल में एईएस के दो संदिग्ध बच्चों का उपचार किया गया। इनमें से डेढ़ वर्षीय बच्ची को परिजन अपनी इच्छा से गोरखपुर ले गए, जहां बीआरडी मेडिकल कॉलेज में इलाज के दौरान उसकी मौत हो गई। वहीं दूसरे बच्चे की हालत में सुधार होने पर उसे सोमवार को डिस्चार्ज कर दिया गया।
अस्पताल प्रशासन के अनुसार, सिद्धार्थनगर जिले के खुनियांव ब्लॉक के मंधरिया गांव निवासी मुमताज अहमद अपनी डेढ़ वर्षीय बेटी अनाया को 20 जुलाई को जिला अस्पताल लेकर आए थे। बाल रोग विशेषज्ञ डॉ. सलीम ने हाईग्रेड बुखार और लक्षणों के आधार पर उसे संदिग्ध एईएस मानते हुए भर्ती कर उपचार शुरू किया।
22 जुलाई को परिजन बच्ची को अपनी सहमति से अस्पताल से लेकर पहले गोरखपुर के एक निजी अस्पताल पहुंचे। वहां इलाज का खर्च अधिक होने पर उसे बीआरडी मेडिकल कॉलेज में भर्ती कराया गया। जिला अस्पताल की ओर से मरीज की स्थिति की जानकारी लेने पर परिजनों ने बताया कि सोमवार सुबह करीब 4:40 बजे उपचार के दौरान बच्ची की मौत हो गई।
दूसरा मामला संतकबीरनगर जिले के बेलहरकला ब्लॉक का है। यहां की सात वर्षीय अंशिका को 22 जुलाई को तेज बुखार की शिकायत पर जिला अस्पताल लाया गया था। बाल रोग विशेषज्ञ डॉ. पीएस पटेल ने उसे संदिग्ध एईएस मानते हुए पीडियाट्रिक इंटेंसिव केयर यूनिट (पीआईसीयू) में भर्ती किया। चार दिन के उपचार के बाद उसकी हालत में सुधार हुआ और सोमवार को उसे छुट्टी दे दी गई। हालांकि, उसकी एलपी (लंबर पंचर) जांच रिपोर्ट अभी लंबित है।
अस्पताल प्रशासन का कहना है कि अनाया के परिजन उसे उपचार के दौरान अपनी इच्छा से अस्पताल से लेकर चले गए थे। बाद में फोन पर जानकारी मिली कि उसकी मृत्यु हो चुकी है। चिकित्सकों के अनुसार, दोनों बच्चों में हाईग्रेड बुखार के लक्षण थे, इसलिए एईएस की आशंका को देखते हुए इलाज शुरू किया गया। इस सीजन में जिला अस्पताल में अब तक एईएस के चार संदिग्ध मामले दर्ज हो चुके हैं। इनमें से दो मामले बस्ती जिले के हैं, एक मामला 20 मार्च को गौर ब्लॉक और दूसरा मामला 13 जून को सल्टौआ ब्लॉक में मिला था।