बस्ती। साइबर क्राइम थाना पुलिस ने शुक्रवार को ग्राहक सेवा केंद्र संचालकों को यूपीआई और अन्य माध्यमों से भुगतान सफल होने का फर्जी स्क्रीनशॉट दिखाकर नकदी हड़पने वाले गिरोह के दो आरोपियों को गिरफ्तार किया। आरोपियों के पास से चार एंड्रायड मोबाइल, 20 हजार रुपये नकद और एक कार बरामद हुई है।
एएसपी श्यामकांत ने मामले का खुलासा करते हुए बताया कि दो सितंबर को अस्पताल चौराहा स्थित एक दुकान पर सुनील कुमार के पास एक युवक पहुंचा था। युवक ने अपने मोबाइल में भारतीय स्टेट बैंक के योनो एप से भुगतान किए जाने का स्क्रीनशॉट दिखाया। स्क्रीनशॉट में 9,090 रुपये का भुगतान सफल होना दिख रहा था। युवक की बात पर विश्वास कर सुनील ने उसे रकम के बदले नकदी दे दी। बाद में खाते की जांच करने पर सुनील को पता चला कि उनके खाते में कोई रकम आई ही नहीं थी। इसके बाद उन्होंने साइबर क्राइम थाने में शिकायत दर्ज कराई। पुलिस ने मामले में प्राथमिकी दर्ज कर जांच शुरू की।
जांच के दौरान पुलिस ने आरोपियों की पहचान हरिद्वार के मंगलौर क्षेत्र के लधौरा निवासी विशाल कुमार चौधरी और कानपुर देहात के सेन पश्चिम पारा थाना क्षेत्र के करौली सरकार निवासी रिषभ सिंह भदौरिया के रूप में की। पुलिस टीम ने शुक्रवार को दोनों को गिरफ्तार कर लिया। पुलिस के अनुसार, विशाल के खिलाफ मुजफ्फरनगर के कोतवाली नगर थाने में भी साइबर अपराध का मामला दर्ज है।
कमीशन का लालच देकर लेते थे नकदी
पूछताछ में आरोपियों ने बताया कि वे ग्राहक सेवा केंद्र संचालकों को कमीशन का लालच देते थे। उनसे कहते थे कि उनके क्यूआर कोड पर रुपये भेज देंगे और संचालक अपना कमीशन काटकर उन्हें नकदी दे दें। इसके बाद आरोपी मोबाइल में भुगतान सफल होने की फर्जी रसीद या स्क्रीनशॉट दिखाकर नकदी ले लेते थे। संचालक जब तक अपने खाते की जांच करता, तब तक आरोपी मौके से फरार हो जाते थे।
अन्य जगहों पर भी की ठगी
पुलिस के मुताबिक, आरोपियों ने काशीरामपुर और इटावा में 8,080 रुपये तथा फिरोजाबाद में 1.01 लाख रुपये की इसी तरह ठगी की थी। पुलिस के अनुसार, वर्ष 2024 में आरोपी विशाल ने मुजफ्फरनगर के कोतवाली नगर क्षेत्र के बहेड़ी गांव स्थित एक जनरल स्टोर पर खुद को हिंदुस्तान लीवर कंपनी का कर्मचारी बताया था। उसने नकदी की जरूरत होने की बात कहकर दुकानदार से कमीशन काटकर नकदी देने को कहा और 20 हजार रुपये लेकर फरार हो गया था। इस मामले में उसे गिरफ्तार किया गया था। जेल से छूटने के बाद वह दोबारा इसी तरह की ठगी करने लगा।