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Basti News: नौतपा का तिहरा वार... आंच, उमस फिर आंधी

Tue, 26 May 2026 02:00 AM IST
गोरखपुर ब्यूरो संवाद न्यूज एजेंसी, बस्ती
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सिद्धार्थनगर। दोपहर में आग उगलती सड़कें, रात में चिपचिपी गर्मी के बीच बेचैनी और शाम होते-होते धूल से भरा आसमान। सिद्धार्थनगर में इस बार नौतपा सिर्फ गर्मी नहीं बल्कि मौसम पर तीन तरफा वार होगा। तराई और हिमालयी इकोसिस्टम के असर से अगले आठ दिन में जिले को लू, उमस और आंधी-पानी के आसार हैं।
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मौसम वैज्ञानिकों के मुताबिक इस बार सबसे बड़ा खतरा सिर्फ उच्च तापमान नहीं बल्कि लू, उमस, गर्म रात और आंधी के संयुक्त असर का बने रहने की आशंका है। दिन में 44 डिग्री तक तापमान और रात में 30 डिग्री के आसपास पारा रहने से शरीर को लगातार गर्मी झेलनी पड़ सकती है। उमस बढ़ने पर पसीना जल्दी नहीं सूखता, जिससे शरीर खुद को ठंडा नहीं कर पाता और हीट स्ट्रोक का खतरा बढ़ जाता है। बच्चों, बुजुर्गों, मजदूरों और बीपी-शुगर मरीजों पर इसका असर ज्यादा पड़ सकता है।
25 मई से शुरू हुए नौतपा के दौरान जिले का अधिकतम तापमान 41 से 44 डिग्री सेल्सियस तक पहुंचने का अनुमान है। मौसम विज्ञानियों ने बताया कि शुरुआती चार दिनों में आसमान साफ रहेगा और दोपहर में चलने वाली गर्म व शुष्क हवाएं लू का रूप लेंगी। न्यूनतम तापमान भी 27 से 30 डिग्री सेल्सियस के बीच रह सकता है, यानी रातें भी राहत नहीं देंगी।
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आचार्य नरेंद्र देव कृषि एवं प्रौद्योगिक विश्वविद्यालय, अयोध्या के मौसम वैज्ञानिकों के अनुसार नौतपा सिर्फ तेज गर्मी नहीं बल्कि सूर्य, गर्म जमीन, हवाओं और नमी से मिलकर बनने वाला वातावरणीय सिस्टम है। मई के आखिरी सप्ताह में सूर्य की किरणें सीधे पड़ने से जमीन तेजी से गर्म होती है। इससे कम दबाव बनता है और गर्म, शुष्क हवाएं तेज हो जाती हैं, जिन्हें लू कहा जाता है।
मौसम विज्ञानी डॉ. अमरनाथ मिश्र का कहना है कि सिद्धार्थनगर का मौसम बाकी मैदानी जिलों से अलग है। नेपाल सीमा से सटे तराई क्षेत्र में जमीन और हवा दोनों में नमी ज्यादा रहती है। इसी कारण यहां तापमान कम होने पर भी गर्मी ज्यादा महसूस होती है।
विशेषज्ञों के मुताबिक हिमालयी इकोसिस्टम यहां मौसम को तेजी से बदलता है। नेपाल के पहाड़ी इलाकों से आने वाली नम हवाएं जब मैदानी गर्म हवाओं से टकराती हैं तो मौसम अचानक करवट लेने लगता है। यही वजह है कि तेज धूप के कुछ घंटों बाद ही धूलभरी आंधी, गरज-चमक और हल्की बारिश जैसी स्थितियां बन जाती हैं।
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