सरकार ने लेखपाल सेवा नियमावली में संशोधन कर 65 सालों से चली आ रही
पुरानी व्यवस्था को बदल दिया है। नई व्यवस्था के तहत अब लेखपाल को मंडल के
किसी भी जिले में तबादला किया जा सकता है।
तबादला करने का अधिकार
कमिश्नर को दिया गया है। राज्यपाल की ओर से इसकी मंजूरी भी मिल चुकी है।
कमिश्नर एक साल में 20 फीसदी लेखपालों का तबादला कर सकेंगे।
लेखपाल
संघ ने सरकार के इस फैसले का विरोध किया है और कहा है कि इससे लेखपालों का
उत्पीड़न और शोषण बढ़ेगा। विरोध स्वरूप आंदोलन करने की चेतावनी दी
है।सरकार ने लेखपाल सेवा नियमावली में संशोधन करते हुए अब उन्हें मंडल स्तर
का लेखपाल बना दिया है।
पहले यह जिला स्तर के लेखपाल के रूप में
जाने थे। जिसके तहत इनका तबादला जिले से बाहर नहीं हो सकता था। जिले के
भीतर तबादला करने का अधिकार पहले शासन ने डीएम को दिया था।
तहसील
स्तर एसडीएम करते थे। अब नहीं व्यवस्था के तहत जिले के 20 फीसदी लेखपालों
का तबादला मंडल के अन्य जनपदों में कमिश्नर करेंगे। इतना ही नहीं, शासन ने
जिन आवेदकों की आयु पहली जुलाई को 18 वर्ष प्राप्त कर ली हो और 40 साल से
अधिक न हो उसकी नियुक्ति लेखपाल के पद पर हो सकती है।
पहले अधिकतम
आयु 35 साल की थी। लेखपाल संघ के मंडलीय मंत्री नरेंद्र बहादुर उपाध्याय ने
बताया कि लेखपाल संघ सरकार के इस फैसले का विरोध करता है।
इसे
लेकर संघ की ओर से सीएम और डीएम को ज्ञापन दिया जा चुका है। बताया कि जनपद
में कई ऐसे पद हैं जो लेखपाल के समक्ष या उससे ऊपर के हैं। सरकार की मंशा
पूरी नहीं होने दी जाएगी और इसके लिए व्यापक आंदोलन छेड़ा जाएगा।