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Basti News: तीन माह बाद भी अस्पताल संचालक का सुराग नहीं, जांच अधूरी

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बस्ती। मुंडेरवा स्थित अमृत अस्पताल में महिला की मौत के मामले को तीन माह बीत चुके हैं, लेकिन अस्पताल संचालक डॉ. मनीष की गिरफ्तारी अब तक नहीं हो सकी है। पुलिस ने मामले में दो कर्मियों को गिरफ्तार किया था, लेकिन नामजद संचालक तक नहीं पहुंच सकी। दूसरी ओर अस्पताल सील होने के कारण अभिलेख उपलब्ध नहीं हो पाए हैं। इससे जांच भी अधूरी है। अस्पताल में पंजीकृत चिकित्सक का बयान भी अब तक दर्ज नहीं किया जा सका है।
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लोहदर निवासी अनिल कुमार चौधरी 14 मई को पत्नी को खुजली की शिकायत होने पर मुंडेरवा के अमृत अस्पताल लेकर पहुंचे थे। आरोप है कि अस्पताल में बिना समुचित जांच के महिला को लगातार तीन इंजेक्शन लगाए गए। इसके बाद उसकी मौत हो गई। घटना के बाद अनिल की तहरीर पर पुलिस ने अस्पताल संचालक डॉ. मनीष और अज्ञात के खिलाफ प्राथमिकी दर्ज की थी।
पुलिस ने मामले में अस्पताल के दो कर्मियों को गिरफ्तार किया, लेकिन संचालक अभी तक फरार बताया जा रहा है। संचालक की गिरफ्तारी नहीं होने से मामले की आगे की जांच भी प्रभावित हो रही है। वहीं, स्वास्थ्य विभाग की ओर से अस्पताल की जांच और कार्रवाई भी अभी पूरी नहीं हुई है।
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जांच में सामने आया था कि अमृत अस्पताल का पंजीकरण 30 अप्रैल को समाप्त हो चुका था। इसके बाद भी अस्पताल का संचालन जारी था। पंजीकरण नवीनीकरण के लिए अस्पताल संचालक की ओर से विभाग में कोई आवेदन भी नहीं दिया गया था। विभाग की ओर से अस्पताल को सील कर दिया गया था। अधिकारियों की ओर से अस्पताल पर जुर्माना लगाने की बात भी कही गई थी, लेकिन अब तक मामले में कार्रवाई पूरी नहीं हो सकी है।

सील अस्पताल के कारण नहीं मिल सके अभिलेख
अस्पताल सील होने के कारण वहां के अभिलेख भी जांच टीम को नहीं मिल सके हैं। इसके अलावा अस्पताल में पंजीकृत चिकित्सक का बयान भी दर्ज नहीं हो पाया है। ऐसे में महिला की मौत के मामले में विभागीय जांच अभी लंबित है।

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कई निजी अस्पतालों की जांच रिपोर्ट लंबित, न्याय की टूट रही उम्मीदें
पचपेड़िया रोड स्थित निजी अस्पताल में बुजुर्ग महिला की ढाई माह पहले उपचार के दौरान मौत हो गई थी। परिजन हंगामा किए थे। मौके पर पहुंची पुलिस ने मामले को शांत कराया। शिकायत के बाद भी विभाग ने कोई कार्रवाई नहीं की। इसके अलावा बरदहिया स्थिति अवैध अस्पताल में एक महिला के बच्चेदानी का ऑपरेशन कर दिया गया, इससे उसी तबीयत बिगड़ गई थी। बाद में उसकी मौत हो गई। मामले में अभी तक कार्रवाई नहीं हो सकी है, जबकि ढाई माह से अधिक समय बीत गया है। इसके अलावा कटरा स्थित अस्पताल में दो माह पहले बुजुर्ग की हुई मौत के प्रकरण में भी कोई कार्रवाई नहीं हुई। दो माह बीत जाने के बाद भी कार्रवाई नहीं हुई है। वहीं, स्टेशन रोड स्थित अस्पताल में जच्चा-बच्चा मौत प्रकरण में भी मामला लंबित है, एक माह से अधिक का समय बीत गया है। जांच तक नहीं हो सकी है। वहीं, मरवटिया सीएचसी के तहत बैजनाथपुर गांव में भी प्रसूता की मौत प्रकरण में एएनएम पर कार्रवाई नहीं हो सकी है। घटना 10 दिन पहले हुई थी। एएनएम अपने घर पर ही प्रसव करवाई थी। इससी प्रसूता की तबीयत बिगड़ गई और कैली अस्पताल ले जाते समय मौत हो गई थी। परिजन इसमें भी लापरवाही का आरोप लगाए थे।

निजी प्रैक्टिस के आरोपी एसोसिएट प्रोफेसर की मांगी आख्या
मेडिकल कॉलेज अंबेडकरनगर में एसोसिएट प्रोफेसर के पद पर तैनात और बस्ती स्थित एक हॉस्पिटल में कथित तौर पर प्राइवेट प्रैक्टिस करने के आरोपी सर्जन डॉ. नवीन कुमार चौधरी के मामले में कार्रवाई की प्रक्रिया आगे बढ़ गई है। मेडिकल कॉलेज के प्रधानाचार्य ने इस प्रकरण में सीएमओ बस्ती से आख्या मांगी है। मामला ओमवीर हॉस्पिटल में हुई एक सर्जरी के बाद मरीज की मौत से जुड़ा है। नगर थानाक्षेत्र के कटया निवासी वीरेंद्र कुमार ने डीएम को शिकायत देकर आरोप लगाया था कि उनके पिता पल्टूराम का ऑपरेशन ओमवीर हॉस्पिटल, कैली रोड पर हुआ था, जिसके बाद उनकी मौत हो गई। शिकायत की जांच डिप्टी सीएमओ से कराई गई। जांच में यह तथ्य सामने आया कि सर्जरी डॉ. नवीन कुमार चौधरी ने की थी, जो वर्तमान में एमआरए मेडिकल कॉलेज, अंबेडकरनगर में एसोसिएट प्रोफेसर के पद पर तैनात हैं। सरकारी सेवा में रहते हुए प्राइवेट प्रैक्टिस के आरोप को गंभीर मानते हुए डीएम ने जांच आख्या अनुशासनात्मक कार्रवाई के लिए मेडिकल कॉलेज के प्रधानाचार्य को भेज दी। अब मेडिकल कॉलेज प्रशासन ने मामले में अग्रिम कार्रवाई के लिए सीएमओ बस्ती से विस्तृत आख्या तलब की है। आख्या मिलने के बाद नियमानुसार आगे की कार्रवाई की जाएगी।
कोट
मुंडेरवा अमृत अस्पताल की जांच अभी चल रही है। पंजीकरण के बिना अस्पताल का संचालन गलत है। जांच रिपोर्ट के लिए संबंधित डिप्टी सीएमओ को निर्देशित किया जाएगा।
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- डॉ. राजीव निगम, सीएमओ, बस्ती।
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