संवाद न्यूज एजेंसी
बस्ती। बीडीए की ओर से शहर के शास्त्री चौराहे को संवारने की योजना सिर्फ कागज की होकर रह गई। छह माह पहले यहां एक तरफ समृद्धि चौक और दूसरी ओर शक्ति स्तंभ बनाने के लिए निविदा प्रक्रिया पूरी की गई थी। इसी के बाद जिम्मेदार भूल गए। इससे निर्माण कार्य शुरू नहीं हो सका। यह योजना ठंडे बस्ते में चली गई है।
शहर के पुराने प्रवेश द्वार के शास्त्री चौराहे पर आमने-सामने समृद्धि चौक और शक्ति स्तंभ के निर्माण की योजना बीडीए ने तैयार की थी। उद्देश्य था कि शास्त्री चौराहे की रौनक बढ़ जाए।
डिजाइन ऐसी बनाई गई थी कि लखनऊ की तरफ से यहां आने पर लोगों को शक्ति स्तंभ दिखाई देता और शहर से निकलने पर समृद्धि चौक की तस्वीर झलकती। सात लाख रुपये की लागत से बनने वाले समृद्धि चौक पर हरित क्रांति के अग्रदूत किसानों के समूह को दर्शाता हुआ दीर्घ आकार का स्टैच्यू स्थापित किया जाना था।
यह आकर्षण का केंद्र भी बनता और खुशहाली का संदेश देता। स्टैच्यू में अपने क्षेत्र के कृषि कार्य की झलकियां देखने को मिलती। दूसरी तरफ सोल्जर बोर्ड की ओर से शहीदों के सम्मान में शक्ति स्तंभ का निर्माण प्रस्तावित था।
इस पर आठ लाख रुपये का खर्च निर्धारित हुआ। इन दोनों कार्यों के लिए निविदा प्रक्रिया छह माह पहले ही पूरी कर ली गई। मगर, निर्माण कार्य शुरू नहीं हो सका। कुछ दिनों तक इसके निर्माण का मामला पीडब्ल्यूडी के चक्कर में उलझ गया। क्योंकि पीडब्ल्यूडी की ओर से शास्त्री चौराहे से होकर गुजरने वाली सड़क के चौड़ीकरण का प्रस्ताव तैयार कर शासन को भेज दिया था। ऐसे में बीडीए समृद्धि चौक और शक्ति स्तंभ के लिए पीडब्ल्यूडी से स्थल चयन की अपेक्षा जाहिर की। इसी के बाद दोनों विभागों में समन्वय न बन पाने के कारण निर्माण का मामला लटक गया। इससे चौराहे पर सुंदरीकरण का कार्य नहीं दिख रहा है। ड