परसा जाफर में घूमते कुत्ते। संवाद
बस्ती। शहर ही नहीं गांव की गलियों में कुत्तों की दहशत है। बुधवार को परसा जाफर गांव में आतंक का पर्याय बने कुत्ते को दोपहर में ग्रामीणों ने पीटकर मार डाला। तीन वर्षीय हस्सान को लहूलुहान करने से पहले सृष्टि (4) और किशन (28) को निशाना बनाया था। एक भैंस और बकरी को भी नोच लिया था। इसके अलावा गांव के रास्ते से गुजरने वाले लोगों पर भी झपट्टा मारने से नहीं चूक रहा था।
ग्रामीणों का कहना है कि गांव में ही पला-बढ़ा कुत्ता बुधवार की सुबह से ही हिंसक हो गया था। उसका व्यवहार बदला हुआ था। गांव निवासी मोहम्म्द इरशाद का तीन वर्षीय बेटा हस्सान पैदल बिस्किट खरीदने जा रहा था। इसी बीच पीछे से कुत्ते ने हमला कर दिया। उसके पेट, चेहरे और सिर को लहूलुहान कर दिया था। जिला अस्पताल में उपचार और रेबीज का इंजेक्शन लगाने के बाद अस्पताल से छुट्टी दे दी गई।
सृष्टि और किशन भी जिला अस्पताल इंजेक्शन लगवाने जिला अस्पताल आए थे। ग्रामीणों का कहना है कि कुत्तों के डर से बृहस्पतिवार को बच्चे अकेले घर से निकलने से डर रहे थे। वह बिना किसी को साथ लिए बहार जाने से कतराते थे। उनका कहना है कि हिंसक हुआ कुत्ता गांव के लोगों को पहचानता था। जब वह छोटा था तो बच्चों के साथ खेलता भी था, पता क्यों हिंसक हो गया कुछ समझ में नहीं आ रहा है। बतादें कि 16 नवंबर को हर्रैया थाना क्षेत्र खैरी ओझा गांव निवासी रंजीत चौहान का सात वर्षीय बेटा शिवम चौहान पड़ोसी के बेटे के साथ घर के बाहर दोपहर में खेल रहा था। इस दौरान एक कुत्ते ने अचानक शिवम पर हमला बोल दिया था। इससे लहूलुहान हो गया था।
जिला अस्पताल की ओपीडी में रोजाना 40 से 50 लोग रेबीज का इंजेक्शन लगवाने आ रहे हैं। एसआईसी डॉ. खालिद रिजवान अहमद का कहना है कि जिला अस्पताल में पर्याप्त मात्रा में रेबीज का इंजेक्शन उपलब्ध है।