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कटरिया-चांदपुर तटबंध का ठोकर नदी में बहा

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चांदपुर-कटरिया तटबंध पर पहुंचे अफसर। - फोटो : amar ujala
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दुबौलिया। सरयू नदी का जल स्तर खतरे के निशान से 92.730 मीटर  से 52 सेंटीमीटर ऊपर 93.250 मीटर पर स्थिर है। पानी स्थिर होने के बाद फिर नदी ने कटान का कहर बरपाना शुरू कर दिया है। पानी के जबरदस्त दबाव के चलते कटरिया-चांदपुर तटबंध का ठोकर नदी में बह गया। 
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दोपहर करीब एक बजे चांदपुर गांव के पास बने ठोकर नंबर तीन पर पानी के तेज बहाव के चलते सौ मीटर ठोकर तटबंध से लेकर नोज तक का पूर्वी हिस्सा बह गया। बाढ़ खंड के अधिकारियों ने कटान स्थल पर मरम्मत कार्य तेजी से शुरू करवा दिया, लेकिन तब तक कटान का दायरा तटबंध पर भी पहुंच गया। इसके चलते तटबंध का स्लोप भी पानी के बहाव में कटने लगा, जिस से करीब बीस मीटर तटबंध का स्लोप कट गया है। कटान की सूचना पर ग्रामीण बंधे पर एकत्र होने लगे, इसकी भनक लगते ही मौके पर दुबौलिया पुलिस पहुंच गई। थोड़ी ही देर में भीड़ भी बंधे पर एसडीएम एसपी शुक्ल व अधिशासी अभियंता डीके त्रिपाठी भी पहुंच गए और मरम्मत कार्य मे तेजी लाने का आदेश दिया। करीब दो घंटे कटान के बाद स्थिति नियंत्रण में हुई तब जा कर मरम्मत कार्य में जुटे अधिकारियों व मजदूरों ने राहत की सांस ली। वहीं, गौरा-सैफाबाद तटबंध पर पारा गांव के पास बने ठोकरों पर भी पानी का दबाव बना हुआ है। किशुनपुर, मोजपुर रिंगबांध पर पानी का दबाव बना हुआ है। बाढ़ के पानी से घिरे सुविखा बाबू, भूअरिया, टेडवा, सतहा आदि गांव में महीनों से पानी भरा हुआ है। जलस्तर बढ़ने से विशुनदासपुर का पुरवा, पूरे मोती राम, बानेपुर, बरदिया लोहार का पुरवा आदि के ग्रामीण उसी रास्ते आ-जा रहे हैं। 

सरयू फिर बढ़ी, बाढ़ग्रस्त क्षेत्र में चारे का संकट 
विक्रमजोत। सरयू नदी की बाढ़ से घिरे दो दर्जन गांवों के ग्रामीणों की जीवनचर्या बदल गई है। बाढ़ के पानी ने रोजगार, घरबार, खेत खलिहान सब छीन लिया है। बाढ़ और कटान का दंश झेल रहे इन पीड़ितों का कोई सुनने वाला नहीं है।  
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अकेले विक्रमजोत ब्लॉक के बाढ़ प्रभावित 17 गांव की लगभग 25 हजार की आबादी सरयू नदी के बाढ़ का प्रकोप हर साल झेलते हैं। इसमें कल्याणपुर, सहजौरा, भरथापुर, छतौना, संदलपुर, केशवपुर, भदोई, रामनगर सहित बीडी बांध के किनारे के दो दर्जन गांव शामिल रहते हैं। केंद्रीय जल आयोग के अयोध्या कार्यालय के अनुसार बुधवार को नदी का जलस्तर 93.22 मीटर से लगातार बढ़ रहा है। जो अभी भी खतरे के निशान से 52 सेंटीमीटर ऊपर है। बाढ़ विभाग के अवर अभियंता मकलूराम, दयाशंकर सिंह कटान क्षेत्र की निगरानी कर रहे हैं। ब्लॉक क्षेत्र के 27 गांव बाढ़ से प्रभावित हुए हैं। इनमे लकड़ी दूबे, पड़ाव, रानीपुर कठवनिया में पानी घुस गया है। 22 अन्य गांव लमती, केशवपुर, रामनगर, बाघानाला, भदोई, फूलडीह, चानपुर, संदलपुर, कवलपुर, छतौना, कन्हईपुर, खेमराजपुर, पूरेचेतन, पकड़ी सूर्यवंश, माझा किता अव्वल, मरणामाझा, मल्हनी, मुनियावां, जोगापुर, रिधौरा, माचा, हैदराबाद आदि गांवों के खेतों में बाढ़ का पानी पहुंच गया है। दूसरी ओर नदी की मुख्य धारा निर्माणाधीन विक्रमजोत-लोलपुर तटबंध से सटकर बह रही है। वहीं, तटबंध पर बने ठोकरों पर लगातार दबाव बना हुआ है। ठोकर नंबर दो और तीन से टकरा रही नदी की मुख्यधारा ने दोनों महत्वपूर्ण ठोकरों के नोज को क्षतिग्रस्त कर दिया है। रुक-रुक कर हो रही बरसात ने बाढ़ विभाग की राहत सामग्री स्पाट तक नहीं पहुंच पा रही है, जिससे राहत कार्य प्रभावित हो रहा है।

सरयू की धारा में बह गए कई गांव, शरणार्थी बन गए ग्रामीण  
दुबौलिया। दस वर्षों में सरयू की धारा ने ऐसा कहर बरपाया कि नदी और बांध के बीच बसे कई गांवों का अस्तित्व मिट गया तो कई गांवों का अस्तित्व मिटने के कगार पर है। ऐसे में बेबस ग्रामीण कटान की डर से तिनका-तिनका जोड़कर बनाए गए आशियाने पर हथौड़ा चलाने क़ो बेबस हैं। इन गांवों में सड़क, नाली, पानी व बिजली आदि की व्यवस्था थी, लेकिन कटान ने सब कुछ बर्बाद कर दिया। ऐसे में यहां के ग्रामीण शरणार्थी हो गए हैं, लेकिन तहसील प्रशासन भी इनको बसाने के लिए जमीन तलाशने में भी जुट गया है। करीब दस वर्ष पूर्व आराजीडूही एहमाली का गांव, नई दुनिया कटान की चपेट में आकर उजड़ गया। जहां पक्की सड़क, बिजली के पोल व परिषदीय विद्यालय भी नदी की धारा में कट गए। यहां के ग्रामीण करीब आठ वर्ष तक कटरिया-चांदपुर तटबंध पर पन्नी व छप्पर डाल शरणार्थी का जीवन व्यतीत कर रहे थे। पिछले वर्ष तटबंध की कटान में छप्पर जब अवरोध उत्पन्न करने लगा, तब प्रशासन की नींद टूटी और इनको बांध व रामजानकी मार्ग के बीच विस्थापित कर दिया। वहीं, वर्ष 2013 की कटान की जद में आया पहड़वापुर गांव को बचाने के लिए ग्रामीणों ने जल सत्याग्रह कर दिया था, जिसको लेकर जनप्रतिनिधियों ने भी आवाज उठाई और आंदोलन में ग्रामीणों का साथ दिया, लेकिन न तो गांव बचा और न ही ग्रामीणों को सरकार से सहायता मिली। गनीमत थी कि ग्रामीणों के पास तटबंध इस पार अपनी जमीन थी। जहां ये आशियाना बना जीवन यापन शुरू कर दिए। वहीं, देवारागंगबरार भी जब कटान की जद में आया तो कुछ लोग बैरागल गांव की सड़क की पटरी पर जीवन यापन करने लगे। एसडीएम हर्रैया एसपी शुक्ल का कहना है कि कटान की चपेट में आए दिलासपुरा और खजांचीपुर के लोगों के लिए जमीन तलाश ली गई है। पीड़ितों को पूरी मदद पहुंचाई जाएगी।
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