आम के उत्पादन और मिठास में इस्रायल के कृषि विशेषज्ञों की टीम मदद देगी। इसे लेकर सोमवार को आयुक्त सभागार में इंडो-इस्रायल क्लस्टर मैंगो वर्कशॉप का आयोजन किया गया।
इस्रायल के सहयोग से आम का बेहतर फल तैयार करने तथा इसके पौधा एवं आधुनिक तकनीकी अपनाने के उद्देश्य से उद्यान विभाग की ओर से 19 से कार्यशाला शुरू हुई जो 21 मार्च तक आयुक्त सभागार में चलेगी। इंडो-इस्रायल क्लस्टर मैंगो वर्कशाप की शुरुआत कमिश्नर दिनेश कुमार सिंह ने की। वर्कशॉप में इस्रायल की कृषि विशेषज्ञ टिमना सोयर, कृषि निदेशक एमपी जोशी आदि शामिल हैं। कमिश्नर ने कहा कि इंडो-इस्रायल संधि के तहत प्रदेश के बस्ती और कन्नौज में सेंटर ऑफ एक्सीलेंस तैयार किए जा रहे हैं। कर्नाटक, गुजरात, हरियाणा एवं बिहार के प्रोजेक्ट ऑफिसर भी वर्कशॉप में पहुंचे हैं। कमिश्नर ने कहा कि कार्यशाला से किसान लाभान्वित होंगे तथा आम का बेहतर फल हमें नई शोध से प्राप्त होगा। कृषि निदेशक के मुताबिक प्रदेश में 2.75 लाख हेक्टेयर आम का बाग है। 60 से 70 प्रतिशत काफी घने हैं, जिससे उत्पादकता कम हो गई है। ऐसे कार्यशाला से उसमें सुधार होगा। टीम ने कृषि विज्ञान केंद्र बंजरिया का भी भ्रमण किया।
17 सेंटीग्रेड तापमान में डालें कंपोस्ट
इस्रायल की विशेषज्ञ टिमना ने आम की नर्सरी लगाने, कंपोस्ट खाद बनाने, पानी डालने और उनके पॉली बैग के आकार तथा रोपने की विभिन्न कार्यों की जानकारी दी। कहा कि कम्पोस्ट खाद का इस्तेमाल 17 सेंटीग्रेड पर होना चाहिए तथा पॉली बैग छह से 10 लीटर की पानी की क्षमता वाला चाहिए। बताया कि आम की गुठली को जमीन की जगह पॉली बैग में ही लगाएं, जिसमें कंपोस्ट खाद भरी हो। पौधे लगाते समय उसकी स्वस्थता और बेहतर स्थिति का आकलन करना चाहिए।