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Basti News: सूखी रह गईं टोंटियां...फाइलें आंकड़ों से तर-ब-तर

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महुआर गांव में बने ओवरहेड टैंक शोपीस बनकर रहा गया है संवाद
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बस्ती। सरकारी फाइलों में हर घर नल से जल पहुंच चुका है, लेकिन जमीनी हकीकत इससे बिल्कुल इतर है। एक दशक बीत जाने के बाद भी कई गांवों में टोंटियां सूखी पड़ी हैं और शुद्ध पेयजल के लिए जद्दोजहद कर रहे हैं। करोड़ों रुपये खर्च करने के बाद भी जल आपूर्ति योजना धरातल पर नहीं उतर सका है। महुआर गांव के लोगों को प्यास बुझाने के लिए देसी नल का सहारा लेना पड़ रहा है।
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बता दें कि रुधौली ब्लॉक क्षेत्र के महुआर गांव में जल जीवन मिशन के तहत साल 2014-15 में जलनिगम ग्रामीण की ओर से ओवरहेड टैंक और ट्यूबवेल का निर्माण कराया गया था। इस परियोजना पर करीब डेढ़ करोड़ रुपये खर्च हुए थे। यहां चार सौ घरों को पेयजल योजना से जोड़ने का लक्ष्य रखा गया था, इसके लिए पाइपलाइन भी बिछाई गई थी और घरों में टोंटी लगाए गए थे।
इसके बाद लोगों को उम्मीद जगी कि अब देसी नल के पानी से छुटकारा मिलेगा और उन्हें शुद्ध जल मिल सकेगा, मगर एक दशक बाद भी गांव वालों के घरों में पानी नहीं पहुंच सका है।
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गर्मी के दिनोें में लोगों को पेयजल की किल्लत झेलना पड़ता है। आर्थिक रूप से संपन्न परिवार बाहर से डिब्बे का पानी मंगवा लेता है, मगर गरीब तबके के लोग आज भी देसी हैंडपंप या फिर इंडिया मार्क हैंडपंप से अपनी प्यास बुझा रहे हैं। बताया गया कि गांव में हर घर जल पहुंचाने के लिए बने वाटरहेड टैंक से गांव के कई टोलों में पानी की सप्लाई नहीं पहुंच रही है।
ग्रामीणों का कहना है कि भीषण गर्मी में अधिकतर घरों के नल सूख भी जाते हैं, जिससे लोगों पानी के लिए परेशान होना पड़ता है। ग्रामीणों ने बताया कि गांव इंसेफेलाइटिस प्रभावित होने पर यहां प्राथमिकता पर पेयजल परियोजना लाई गई थी।
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चयन के बाद गांव में ओवरहेड टैंक का निर्माण हुआ, उसे पूरा भी करके भुगतान करा लिया गया, मगर गांव की आबादी को आज भी इस टैंक से पानी नसीब नहीं हुआ।
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