बस्ती। शहर की हृदयस्थली गांधीनगर पक्के बाजार इन दिनों अतिक्रमण की चपेट में है। मुख्य मार्ग पर अव्यवस्थित पार्किंग और दुकानों के फैलाव ने हालात बिगाड़ दिए हैं। पड़ताल में कई स्थानों पर आधी सड़क तक निजी वाहन खड़े मिले। सवारियां चढ़ाने-उतारने का काम भी बीच मार्ग पर होता दिखा। नतीजा यह रहा कि अन्य वाहन रेंगते नजर आए और थोड़ी दूरी तय करने में लंबा समय लगा। इससे यातायात व्यवस्था भी बिगड़ गई है।
बाजार से गुजरने वाले मार्ग पर फुटपाथ लगभग गायब है। दुकानों के आगे टिनशेड, ठेले और सामान रखने से पैदल चलने वालों के लिए सुरक्षित जगह नहीं बची।
बुजुर्ग, महिलाएं और स्कूली बच्चे इस मार्ग से गुजरने से परहेज करते हैं, चूंकि जाम के झाम में पड़ना नहीं चाहते। स्थानीय नागरिकों का कहना है कि नियमित अभियान और सख्त निगरानी से ही सुधार संभव है। व्यवस्थित पार्किंग स्थल चिह्नित हों, मार्ग से कब्जा हटे और नियमों का पालन सुनिश्चित हो, तभी गांधीनगर को जाम की गिरफ्त से राहत मिल पाएगी।
इसके अलावा रोडवेज चौराहा भी पूरी तरह से अतिक्रमण की जद में है। सड़क की दोनों पटरियों पर ठेले वालें का कब्जा है। जो जगह बच भी जाती है, वहां आड़ा-तिरछा वाहन खड़ा करके चालक इधर-उधर टहलते हैं।
इससे जाम लग जाता है। उस जाम में फंस कर लोग परेशान हो जाते हैं। यही हाल पुरानी बस्ती का है। दक्षिण दरवाजा से जिला अस्पताल रोड, अस्पताल से कैली मार्ग, पांडेय बाजार और रेलवे स्टेशन मोड़ पर स्थायी व अस्थायी कब्जा बना हुआ है।
सहालग और होली जैसे पर्व में इन क्षेत्रों में दबाव और बढ़ गया है। बताया गया कि खरीदारी की भीड़ और बेतरतीब खड़ी गाड़ियों के चलते प्रमुख चाैराहों से गुजरना मुश्किल हो गया है।
वहीं, ई-रिक्शा, ऑटो वाले भी निर्धारित रूट के बजाय मनमानी तरीके से वाहन दौड़ा रहे हैं। यही नहीं, कई चौक-चौराहे को अनाधिकृत रूप से टैक्सी स्टैंड संचालित हो रहे हैं।