संवाद न्यूज एजेंसी
बस्ती। 84 कोसी परिक्रमा मार्ग के निर्माण में मुआवजे का पेच उलझ गया है। सड़क के लिए पैमाइश की गई भूमि का एक ही बार में थ्री-ए (चिह्नांकन) की कार्रवाई पूरी होनी चाहिए। मगर, यहां दो चरणों में थ्री-ए की कार्रवाई गई। इसके बाद भी तमाम काश्तकार वंचित रह गए।
अब काश्तकारों को एक समान ब्याज की धनराशि मिलना धूमिल होता दिख रहा है। इसके लिए आवाज भी उठने लगी है। 84 कोसी परिक्रमा मार्ग के प्रथम फेज की सड़क के लिए जिले के 56 गांवों में 180 हेक्टेयर भूमि का अधिग्रहण होना है। इसके लिए वर्ष 2023 से पैमाइश शुरू करा दी गई थी। इसके बाद थ्री-ए की कार्रवाई की गई।
इसमें चिह्नित जमीनों का गजट कराया गया। मगर, 56 में से 29 गांव छूट गए। पहली बार प्रकाशन के बाद छूटे हुए काश्तकारों ने दौड़भाग की तो विभाग की नींद टूटी। इसके बाद 29 गांवों का जून में दोबारा प्रकाशन कर थ्री-डी की कार्रवाई शुरू की गई।
हालांकि, अब भी इन गांवों में अधिकतर जगहों की अवार्ड प्रक्रिया पूरी नहीं हो पाई है। इस प्रक्रिया में भी कुछ गांवों के काश्तकारों की जमीन प्रथम चरण के थ्री-ए की कार्रवाई से वंचित रह गए हैं। बाद में थ्री-ए की कार्रवाई में शामिल जमीनों का मूल्यांकन तो हो जाएगा। मगर, ब्याज की रकम पहली बार किए गए थ्री-ए की कार्रवाई की तिथि से नहीं मिलेगा। क्योंकि दोनों चरणों के थ्री-ए की कार्रवाई में छह माह का अंतर बताया जा रहा है।
इससे पहले चरण की थ्री-ए की प्रक्रिया में छूटे हुए काश्तकारों को ब्याज की धनराशि का नुकसान उठाना पड़ सकता है। इसके अलावा जिन गांवों के काश्तकारों के जमीन का गजट होना बाकी है, उन्हें ब्याज की धनराशि में और नुकसान उठाना पड़ सकता है।
इस आशंका में किसान लगातार विभाग और तहसीलों का चक्कर कांट रहे हैं। परशुरामपुर ब्लॉक के संसारपुर, मजगवा, दुखेड़ी, बेरसा आदि गांवों के 20 से अधिक काश्तकार अपनी जमीनों का गजट कराने के लिए दौड़ रहे हैं।
प्रभाकर, लक्ष्मी प्रसाद, परमात्मा आदि का कहना है कि उनकी जमीन की पैमाइश सड़क के लिए की गई थी।
बावजूद इसके गजट प्रक्रिया में शामिल नहीं किया गया। जबकि हम लोग अधिग्रहण प्रक्रिया शुरू होने के समय से ही आश्वस्त हैं कि प्रशासन सभी जगहों पर एक समान कार्रवाई करेगा।
थ्री-ए शामिल न होने से या देर में शामिल किए जाने से हमें प्रथम चरण के काश्तकारों के समान ब्याज की धनराशि नहीं देने की बात कही जा रही है। इससे नुकसान झेलना पड़ रहा है।
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