डीएम के गोद लिए प्राथमिक स्कूल मूड़घाट के बच्चे दूशित पानी पीने को मजबूर है। कई बच्चे बीमार भी हो चुके हैं। शौचालय तक की ठीक से व्यवस्था नहीं है। खुले में शौच करने जाती है बालिकाएं। स्कूल तक जाने के लिए कायदे से रास्ता तक नहीं है। कीचड़ में चलकर बच्चे और शिक्षक स्कूल तक पहुंचते हैं। सबसे खराब स्थित बच्चों के पठन पाठन की रही। स्कूल के बच्चों को पढ़ना लिखना तक नहीं आता। 20 में से मात्र एक बच्चे को लिखना और पढ़ना आता है। इस स्कूल के अधिकतर शिक्षक बच्चों को पढ़ाने के बजाए मोबाइल से चिपके रहते हैं। भवन भी सुरक्षित नहीं है। बिजली और गैस कनेक्शन तक की सुविधा स्कूल में उपलब्ध नहीं है। एक भी बच्चा ड्रेस में नहीं मिला।
गुरूवार को अमर उजाला टीम ने डीएम नरेंद्र सिंह पटेल के गोद लिए गए प्राथमिक विद्यालय मूड़घाट का पड़ताल किया। पहले तो इस स्कूल तक पहुंचने के लिए टीम को रास्ते भर कीचड़ से होकर जाना पड़ा। बताया गया कि अगर इस स्कूल में किसी को जाना है तो उसे अपने मोटर साइकिल को स्कूल से पांच सौ मीटर दूर यानि एनएच के बगल में खड़ी करके जाना होगा। स्कूल में कुल 38 ही बच्चों का नामांकन हुआ है। उनमें भी रिकार्ड के मुताबिक मात्र 20 बच्चे ही सकूल आते हैं, बच्चे स्कूल क्यों नहीं आते इसका पता लगाने के लिए स्कूल के किसी भी शिक्षक ने प्रयास नहीं किया। बच्चों और शिक्षक सहित प्रधान पति हरिश्चंद्र चौहान ने बताया कि स्कूल में लगा इंडिया मार्का हैंड पंप काफी दिनों से खराब है। हैंडपंप से पीला पीला पानी निकल रहा था। बताया कि इसी दूषित पानी पी कर कई बच्चे बीमार हो चुके हैं, और कईयों ने स्कूल आना ही बंद कर दिया। स्कूल में बिजली और गैस का कनेक्शन नहीं है। टीम जब स्कूल पर पहुंची तो वहां पर बच्चों को वैज्ञानिक तरीके से बच्चों को पढ़ाई करने के लिए तैयार किया जा रहा था। गोद लेने के बाद यहां पर विशेष रुपये तैनात किए गए हेड मास्टर डा. सर्वेष्ठ मिश्र ने बताया कि बताया गया उनके व्यक्तिगत प्रयास से प्रथम फाउंडेशन नामक संस्था की ओर से कमाल योजना के तहत लर्निगं कैंप लगाया गया। यह संस्था बच्चों को वैज्ञानिक तरीके से पढ़ना, लिखना और बोलना सिखाती है, बताया कि ट्रेनर की भूमिका राघवराम गुप्त शर्मिला चौधरी की ओर से निभाई जा रही है। ट्रेनर ने बताया कि जब बीस बच्चों के पढ़ने और लिखने का लेबिल जानने के लिए क्लास लगाई गई तो पता चला कि तात्र एक बच्चे को लिखना और पढ़ना आता है। वहीं प्रधान पति ने बताया कि रास्ता, शौचालय और खराब हैंडपंप का प्रस्ताव कई बार सीडीओ, बीएसए और डीपीआरओ के यहां दिया गया। बताया कि रास्ते में एक व्यक्ति के कब्जा कर लेने के कारण रास्ते का निर्माण नहीं हो पा रहा है। बताया कि अगर प्रशासन सहयोग कर दे स्कूल की सारी जरूरतों को पंचायत निधि से पूरा करा दिया जाएगा। वहीं बीएसए मनिराम सिंह ने बताया कि इस स्कूल को माडल बनाने के लिए जो भी हो सकेगा वह विभाग करने के लिए तैयार है।
सोहन सिंह