बस्ती। सरयू नदी का जलस्तर लगातार घट रहा है, लेकिन माझा क्षेत्र के बाढ़ प्रभावित गांवों में दुश्वारियां कम नहीं हुई हैं। पानी घटने के साथ कई गांवों में कीचड़ और जलभराव की समस्या बढ़ गई है। वहीं, नदी की धारा तेज होने से कटान का खतरा बढ़ गया है। इससे तटवर्ती गांवों के लोगों में दहशत है। किसानों के खेत और फसलें नदी की कटान की चपेट में आ रही हैं।
दुबौलिया, कुदरहा, विक्रमजोत और बहादुरपुर क्षेत्र के आंशिक गांव अभी भी बाढ़ से प्रभावित हैं। करीब 20 से 25 गांवों में पानी पूरी तरह नहीं निकल पाया है। कई संपर्क मार्गों से पानी उतरने के बाद वहां कीचड़ फैल गया है, जिससे आवागमन मुश्किल हो गया है। जगह-जगह गड्ढों में पानी जमा होने से मच्छरों का प्रकोप बढ़ गया है। ग्रामीणों को जलजनित और संक्रामक बीमारियों का भी डर सता रहा है। मैरुंड गांव सुविका बाबू के ग्रामीण अभी मोटरबोट के सहारे आवागमन कर रहे हैं।
सतहा, बलुईया, भुवरिया और जेठूपुरवा के श्रीरामपुरवा समेत कुछ गांवों के संपर्क मार्गों से पानी उतर गया है, लेकिन रास्ते कीचड़ से पटे हैं। ग्रामीणों ने एंटीलार्वा का छिड़काव कराने और दवा का छिड़काव कराने की मांग की है। जलस्तर घटने के साथ नदी की कटान ने किसानों की चिंता बढ़ा दी है। तटवर्ती इलाकों में कई जगह नदी किनारे की जमीन कटकर पानी में समा रही है। खेतों में खड़ी धान, गन्ने और अन्य फसलें बाढ़ के पानी में डूबकर बर्बाद हो चुकी हैं। इससे किसानों के सामने आर्थिक संकट खड़ा हो गया है।
कटान के खतरे को देखते हुए बाढ़ खंड की ओर से बचाव कार्य कराया जा रहा है। कटरिया-चांदपुर तटबंध के ठोकर नंबर एक और उमरिया रिंग बांध पर नदी का दबाव बना हुआ है। तटबंध और आसपास के गांवों की सुरक्षा को लेकर ग्रामीण चिंतित हैं। प्रभावित लोगों ने फसलों का सर्वे कराकर मुआवजा देने और कटान रोकने के लिए प्रभावी इंतजाम की मांग की है।