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Basti News: बारिश ने बिगाड़ दी सूरत, उखड़ गए पैच कार्य, बह गईं गिट्टियां

Mon, 03 Jul 2023 12:59 AM IST
गोरखपुर ब्यूरो संवाद न्यूज एजेंसी, बस्ती
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बस्ती। शहर है तो क्या हुआ आहिस्ता चलिए! यदि वाहनों से सरपट दौड़ लगाए तो गच्चा खा जा जाएंगे। यहां सड़क में गड्ढे हैं। अचानक वाहन का पहिया फंसा तो संभल नहीं पाएंगे। गिरकर चोटिल हो जाएंगे। यह हाल एक जगह की नहीं, बल्कि शहर की अधिकतर प्रमुख सड़कों का है। यहां पग-पग पर गड्ढे हैं। कुछ दुर्घटना के सबब तो कुछ जानलेवा भी हैं। अभी इन सड़कों के पुनर्निर्माण की उम्मीद भी मत कीजिए। इनका मरम्मत कार्य सरकारी दांव पेच में उलझ गया है। बात कुछ बनेगी भी तो बारिश के मौसम के बाद। तब तक राह चलते समय आपकी सुरक्षा स्वयं पर निर्भर है।
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शहर की आधा दर्जन प्रमुख सड़कें छह माह से खस्ताहाल है। बारिश ने इनकी सूरत और बिगाड़ दी है। गड्ढे बढ़ गए हैं। कहीं-कहीं इन गड्ढों में बारिश होने से पानी भी भरा हुआ है। सड़क की गिट्टियां बरसात में बहकर इधर उधर बिखर गई है। पैच कार्य गायब है। कहीं ऊबड़-खाबड़ सड़क तो कहीं बिखरी गिट्टियों पर दो पहिया या अन्य हल्के वाहनों का संतुलित चलना संभव नहीं हो पा रहा है। जान जोखिम में डालकर ही शहर की सड़कों पर यात्रा करनी पड़ रही है। कुछ दिन पहले गड्ढों में बिछाई गई गिट्टियां बारिश की वजह से बाहर आ गई हैं। भारी वाहनों के पहिए से यह छिटककर अगल-बगल चल रहे राहगीरों को चोट पहुंचा रही हैं। इन सड़कों पर किसी भी तरह से यात्रा सुरक्षित नहीं हैं। बच-बचाकर पार हो गए तो यह आपकी किस्मत वरना कुछ न कुछ दर्द झेलना ही पड़ रहा है। इन दिनों रात की यात्रा तो और कठिन है। ये गड्ढे दिखाई नहीं देते हैं। ऊपर से बारिश की बूंदों के बीच जल्दी से घर पहुंचने की होड़ में स्पीड बढ़ानी ही पड़ती है। तभी अचानक सामने गड्ढा आ जा रहा है। इससे बचने के लिए इधर-उधर हैंडिल किए तो या बाइक फिसल जा रही है या अगल-बगल चलने वाले दूसरे वाहन से टकरा जा रहे हैं। इस तरह की छिटपुट घटनाएं आए दिन हो रही हैं।

मालवीय मार्ग पर बड़े-बड़े गड्ढे
सुभाष तिराहे से रोडवेज नेहरू तिराहे तक लगभग ढाई किलोमीटर की लंबाई वाले मालपीय मार्ग पर बड़े-बड़े गड्ढे हैं। जगह-जगह पैच कार्य भी उखड़ा हुआ है। रामेश्वपुरी, बैरिहवां, रौता चौराहा पर यह सड़क कई जगहों पर उखड़ गई है। विद्युत कार्यालय, करतार चौराहा, रंजीत चौराहे के पास भी सड़क का अस्तित्व खतरे में हैं। बारिश के समय यहां पानी लग जा रहा है। इससे गड्ढों का अंदाजा नहीं लग पा रहा है। पिकौरा शिवगुलाम पेट्रोल पंप के सामने अभी नाले के पुलिया का कार्य पूर्ण नहीं है। यहां बनाया गया सर्विस लेन काफी सकरा है। संभलकर न चलने पर वाहन नाले में गिरने का खतरा है। नेहरू तिराहे के पास भी इस सड़क का यहीं हाल है। जबकि इस सड़क पर शहरी यातायात के अलावा सरकारी बसों के आवागमन का भी भार है।
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रोडवेज- रेलवे स्टेशन मार्ग पर भी चलने लायक नहीं
रोडवेज से रेलवे स्टेशन मार्ग पर भी चलने लायक नहीं है। किसान हाई स्कूल और पशु चिकित्सालय के पास यह सड़क बुरी तरह से क्षतिग्रस्त है। दो दिन के बारिश में पानी भी भर गया था। दक्षिण दरवाजा से रेलवे स्टेशन तक जगह-जगह सड़क की गिटि्टियां उखड़ गई हैं। बीच सड़क में अनियमित आकार के गड्ढे हैं। आटो रिक्शा, चार पहिया और दो पहिया वाहन हिचकोले खाकर यात्रा पूरी कर रहे हैं। इन वाहनों पर सवार यात्रियों की भी दुर्गति हो जा रही है।

सिविल लाइन मार्ग भी हुआ खराब
कंपनीबाग से सिविल लाइन होते हुए भूअर निरंजनपुर को जाने वाली सड़क भी खराब हो चुकी है। जेल गेट और खौरहवा कालोनी के सामने यह सड़क टूटकर खस्ताहाल हो चुकी है। सुगम यात्रा यहां कठिन है। सावधानी से लोग किसी यहां सड़क में बने गड्ढों को पार कर रहे हैं। कमोवेश यही हाल सिविल लाइन चौराहे से कबीर चौराहा जाने वाली सड़क का हो गया है।

कोतवाली-गांवगोड़िया मार्ग पर यात्रा बहुत कठिन है। सड़क धंसकर नालियों से नीचे हो गई है। जिससे गंदा पानी सड़क पर ही लगा रहता है। गांवगोड़िया चौराहे से चननी मोड़ तक सड़क का अस्तित्व ही गायब है। बरसात होने से दो सौ मीटर की लंबाई में यह सड़क पानी में डूब गई है। स्कूली बच्चों और महिलाओं का इस रास्ते निकलना कठिन हो गया है। वाहन सवार भी यहां पानी में चलने के दौरान गड्ढों में फंसकर गिर जा रहे हैं।
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शुक्रवार की शाम को बारिश के दौरान घर आते समय मालवीय मार्ग पर विद्युत विभाग कार्यालय के सामने अचानक बाइक का पहिया गड्ढे में पड़ गया। अनियंत्रित होने के बाद किसी तरह संभल पाए। तब भी पैर में चोट आ गई। -अखिलेश कुमार शुक्ल, पिकौरा शिवगुलाम।

शहर की सड़कें बहुत खराब हैं। स्टेशन रोड पर तो चलने लायक नहीं है। तीन दिन पहले हम आटो से रेलवे स्टेशन जा रहे थे तभी गड्ढे में आटो का पहिया गिरा और पलट गया। गनीमत रही कि आटो की स्पीड कम थी इसलिए यात्रियों को बहुत चोट नहीं आई। -सत्येंद्र सिंह, रंजीत काॅलोनी।

शहर की सड़कों पर आवागमन ज्यादा होता है। इनकी मरम्मत समय-समय पर बहुत जरूरी है। बावजूद इसके प्रशासन और जनप्रतिनिधि कोई ध्यान नहीं देता है। किसी न किसी काम से इन्हीं सड़कों पर निकलना होता है। संभलकर न चले तो घायल होना तय है। -राजीव उपाध्याय, पचपेडि़या।
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कोतवाली से गांवगोड़ियां मार्ग और ब्राह्मण महासभा से सेंट बेसिल मार्ग काफी हद तक खराब है। बारिश के दिनों में यह रास्ता बंद हो जाता है। लगता ही नहीं हैं कि यह शहरी क्षेत्र की सड़कें है। सिविल लाइन मार्ग भी बदहाल है। जबकि इसी रास्ते सावन में शिव भक्त कांवर लेकर चलेंगे। बिखरी गिट्टियां कांवड़ियों के पैरों में चुभेंगी। -सुधीर सिंह, खीरीघाट, भटोलवा।
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