छात्रा से हैवानियत की गुत्थी सुलझाने में 22 दिन से उलझी है पुलिस
- कप्तानगंज क्षेत्र के कंपोजिट विद्यालय के कमरे में पंखे से लटका मिला था शव
संवाद न्यूज एजेंसी
कप्तानगंज। विकास खंड क्षेत्र के कंपोजिट विद्यालय में 10 फरवरी को मृत पाई गई कक्षा छह की छात्रा के केस में सारे सवाल जस के तस बने हुए हैं। छात्रा की मौत कमरे में हुई या कहीं और से लाकर टांगी गई, उसके साथ हैवानियत हुई या नहीं, पिता व परिवार के लोग किस दबाव में गुमराह करते रहे...जैसे सवाल अब भी सबकी जेहन में कौंध रहे हैं। पुलिस ने अपनी सबसे दक्ष टीम को लगाकर तकनीकी आधार पर छानबीन कराने का दावा किया था, मगर 22 दिन की छानबीन का हासिल कुछ भी सामने नहीं आया।
इसमें दो राय नहीं है कि पुलिस के शुरुआती प्रयास की वजह से ही छात्रा का शव जमीन खोदकर निकाला गया था। पोस्टमार्टम में हत्या से पहले दरिंदगी के लक्षण सामने आते ही तेवर ढीले पड़ गए। अबकहा जाने लगा है कि पुलिस कई अन्य केस की तरह इसे भी ठंडे बस्ते में डाल देने के मूड में है। हालांकि, अधिकारियों का कहना है कि अभी फॉरेंसिक लैब से जांच रिपोर्ट नहीं आई है।
इससे पहले छात्रा के पिता ने पुलिस को काफी गुमराह किया था, मगर 21 फरवरी को कप्तानगंज थाने में उसने तहरीर देकर यह कबूल कर लिया था कि शव को पंखे से उसी ने उतारा था। जबकि, पहले कह रहा था कि उसके पहुंचने पर शव को बेंच पर लिटाया गया था। उसने यह भी गुमराह किया था कि शव को मनोरमा नदी के घाट पर जला दिया है। बाद में पुलिस ने कड़ाई से पूछताछ की तो बताया कि बेटी के शव को उसने जलाया नहीं है, बल्कि मिट्टी में दफन किया है। पुलिस का पहला संदेह उसी पर अब भी है। क्योंकि कई बार बयान बदल चुका शख्स अभी क्या-क्या छिपा रहा है, इसे लेकर पक्के तौर पर भरोसा करना कठिन है।
बता दें कि 10 फरवरी को कप्तानगंज क्षेत्र की 11 वर्षीय छात्रा की रहस्यमय परिस्थितियों में मौत हो गई थी। पहले चर्चा हुई कि घर से किसी बात पर डांट पड़ने के बाद उसने खुदकुशी कर ली। पिता और परिवार के लोगों ने यह कहकर मामले को उलझा दिया कि उसकी बेटी की मौत बीमारी के कारण हुई है।
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कोट
छात्रा की मौत के मामले की टीमें तत्परता से छानबीन में जुटी हैं। जल्द ही केस से पर्दा उठा दिया जाएगा।
स्वर्णिमा सिंह, सीओ रुधौली