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Basti News: शोपीस बना ओवरहेड टैंक, 1.68 करोड़ खर्च पर नहीं मिला पानी

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डारीडीहा गांव में बना ओवरहेड टैंक से नहीं निकल सका एक बूंद पानी संवाद - फोटो : udhampur news
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नगर बाजार (बस्ती)। जिले में जल जीवन मिशन योजना का हाल बेहाल है। गांव में पेयजल परियोजना पूर्ण होने के बाद भी टोंटी से शुद्ध जल की आस पूरी नहीं हो पा रही है। कुछ ऐसा ही हाल है बहादुरपुर ब्लॉक के डारीडीहा गांव का, यहां विभागीय अनदेखी के चलते 1.68 करोड़ की पेयजल परियोजना दम तोड़ती नजर आ रही है। ओवरहेड टैंक बनने के करीब दो वर्ष बाद भी जलापूर्ति शुरू नहीं हो पाई है। सिर्फ कागज में ग्रामीणों को जल मिल रहा है। वह देसी नल से अपनी प्यास बुझा रहे हैं।
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जल निगम ग्रामीण की ओर से नामित कार्यदाई संस्था मे. मेघा इंजीनियरिंग इंफ्रास्ट्रक्चर लि. हैदराबाद ने 27 मार्च 2023 में कार्य शुरू कराया गया था। करीब एक साल बाद यानी 26 मार्च 2024 में कार्य को पूर्ण दिखा दिया गया। इसमें इस गांव की आबादी को पेयजल मुहैया कराए जाने के लिए ओवरहेड टैंक बनवाने और पाइपलाइन बिछाने और घर-घर टोंटी लगाने का दावा भी किया गया।
मगर, करीब दो वर्ष पूर्व बने ओवरहेड टैंक से एक बूंद पानी आज तक नहीं निकल सका और टोटियां सूखी पड़ी हुई हैं। टैंक शोपीस बनकर रह गया है। लोगों ने कहा कि विभागीय लापरवाही के चलते अब तक गांव में जलापूर्ति शुरू नहीं हो पाई है। इससे ग्रामीणों को पेयजल की दिक्कत हो रही है। इस बीच जागरूक ग्रामीणों ने जिम्मेदारों का ध्यान इस और कई बार आकर्षित कराया, लेकिन कोई सुनवाई नहीं हुई।
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इससे ग्रामीणों में जिम्मेदारों के प्रति रोष है। ग्राम प्रधान सुनील चौधरी ने बताया कि निर्माण कार्य पूर्ण होने के बाद से आज तक जलापूर्ति शुरू नहीं हुई। जिससे गांव की आबादी शुद्ध पेयजल के लिए तरस रही है। लोग देसी नल और इंडिया मार्ग हैंडपंप के सहारे अपनी प्यास बुझा रहे हैं। गर्मी में पेयजल संकट गहराएगा।

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डारीडीहा पेयजल योजना बहादुरपुर
योजना की लागत : 168.4300 लाख
प्रारंभ तिथि : 27 मार्च 2023
कार्य पूर्ण होने की तिथि : 26 मार्च 2024
कुल लाभान्वित ग्रामों की संख्या : चार
वर्तमान लाभान्वित जनसंख्या : 2173
गृह संयोजन की संख्या : 432
वितरण प्रणाली लंबाई : 8774 मी.
अवर जलाशय की क्षमता/ऊंचाई :150 किलो./12 मी.
फर्म : मेसर्स मेघा इंजीनियरिंग एंड इंफ्रास्ट्रक्चर लि. हैदराबाद
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ग्रामीण बोले- परियोजना का नहीं मिला लाभ
जल निगम की ओर से बनाई गई पानी टंकी शो-पीस बनकर रह गई है। कागज में योजना को पूर्ण दिखाकर धनराशि का भुगतान करा लिए, मगर, पानी देना भूल गए हैं।
-पंकज यादव, डारीडीहा
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आने वाले समय में गर्मी शुरू हो जाएगी और तेज धूप की तपिश से हलक सूखने लगेगा। इसमें पानी की जरूरत पड़ती है, मगर, विभाग जलापूर्ति शुरू कराने में असफल है।
-विजय कुमार, डारीडीहा
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गांव की आबादी को शुद्ध पेयजल मुहैया कराने के लिए बने टैंक, ट्यूबवेल, टोंटी शोपीस है। यहां की आबादी परियोजना के पूर्ण होने पर भी जलापूर्ति से वंचित है, टोंटी सूखी हैं।
-प्रदीप कुमार, डारीडीहा
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टोंटी से एक बूंद पानी नहीं निकल रहा है। इससे मजबूरन लोग देसी नल का प्रयोग कर रहे। कभी-कभी दूषित जल पीने से संक्रामक रोग फैलने की आशंका बनी रहती है।

-नरसिंह चौधरी, डारीडीहा
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जिस कार्यदायी संस्था ने यह कार्य पूर्ण किया है और संबंधित जेई से यह जानकारी ली जाएगी कि अभी तक जलापूर्ति क्यों नहीं शुरू कराई गई। जो खामियां रह गई हैं, उसे दुरुस्त करवाते हुए जलापूर्ति बहाल कराने का प्रयास होगा।
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-योगेंद्र प्रसाद, एक्सईएन, जलनिगम, ग्रामीण, बस्ती।
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