बस्ती। कफ सिरप की बरामद की गई भारी खेप ने जिले में ड्रग्स नेटवर्क की जड़ों को एक बार फिर बेनकाब कर दिया है। बरामद खेप में मिले अधिकांश सिरप कोडीन आधारित थे, जो कानूनी रूप से सिर्फ चिकित्सकीय प्रिस्क्रिप्शन पर मिलते हैं, लेकिन जमीनी हकीकत यह है कि ये सिरप पैक के पैक युवाओं तक बिना रोकटोक पहुंच रहे हैं।
इस कार्रवाई के बाद साफ हो गया है कि यह सिर्फ छोटे सप्लायरों का खेल नहीं, बल्कि कई जिलों में फैले मल्टीलेयर नेटवर्क का हिस्सा है, जहां मेडिकल स्टोर, ट्रांसपोर्ट, थोक गोदाम और स्थानीय डीलर एक चेन की तरह काम करते हैं। बता दें कि 19 नवंबर को पुरानी बस्ती बांसी रोड की एक फर्म से औषधि विभाग की टीम ने करीब 15,696 बोतल कोडीन युक्त सिरप ट्रॉमाडोल कैप्सूल व अन्य प्रतिबंधित दवाएं भी जब्त की गई थीं। बरामदगी में सामने आया कि सिरप को फर्जी बिल और नॉन-कोडीन श्रेणी के प्रोडक्ट बताकर भेजा जा रहा था।
सामान्य छापे में यह माल ओवर द काउंटर स्टॉक जैसा लगता है, लेकिन कोडीन की मात्रा (10-12एमजी) इसे सीधे एनडीपीएस के दायरे में लाती है। यही वजह है कि इस बार की कार्रवाई में दायरा बढ़ाते हुए पुलिस ने सप्लाई रूट, ट्रांसपोर्टर और स्टॉक पॉइंट्स की जांच शुरू कर दी है। 19 नवम्बर की बरामदगी भी इसी पैटर्न का हिस्सा मानी जा रही है। सूत्र बताते हैं कि हाल में कोडीन वाले ब्रांड की मांग इतनी बढ़ी कि कई जिलों में नकली लेबलिंग तक शुरू हो चुकी है।
नींद नहीं...लत देता है कोडीन
पिछले कुछ वर्षों में स्कूल-कॉलेज के युवाओं में कफ सिरप की लत तेजी से बढ़ी है। मेडिकल कॉलेज के फिजिशियन डॉ. रजत पांडेय बताते हैं कि कोडीन शरीर को सेंट्रल नर्वस सिस्टम डिप्रेसेंट की तरह प्रभावित करता है, जिससे शुरुआती राहत धीरे-धीरे नशे में बदल जाती है। सेवन बढ़ने पर चक्कर, उन्माद, बेसुधी और हार्ट रेट धीमी होने जैसी गंभीर प्रतिक्रियाएं सामने आती हैं। समाजशास्त्री डॉ. रघुवर पांडेय बताते हैं कि कफ सिरप का नशा सिर्फ स्वास्थ्य पर नहीं, बल्कि अपराध तक रास्ता बना रहा है। चोरी, मोबाइल स्नैचिंग, घरेलू हिंसा,सड़क हादसे, स्कूल से गायब रहने जैसी शिकायतें भी आ रही हैं।
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सस्ता और आसानी से मिलने वाला नशा
एक पुलिस अधिकारी ने बताया कि नशेड़ी युवाओं में यह सिरप और इंजेक्शन भी शराब व ड्रग की तरह ही लोकप्रिय हो चुका है, क्योंकि यह सस्ता, आसानी से मिलने वाला और लुक छिपाकर रखने में आसान माना जाता है। पुलिस के अनुसार, जिले में हर महीने हजारों बोतलें खप जाती हैं, जिनमें से बड़ी मात्रा अवैध चेन से आती है। पुरानी बस्ती थाने में दर्ज केस में पुलिस की जांच में जो पैटर्न सामने आया है, उससे पता चला कि कानपुर,ल खनऊ, उत्तराखंड आदि की फैक्टरियों से माल निकलता है। बीच के एजेंट फर्जी बिल बनाते हैं। ट्रक या पिकअप में माल को सामान्य दवाओं के बीच छुपाया जाता है। बस्ती, संतकबीरनगर, गोरखपुर में अलग-अलग छोटे गोदामों में खेप उतारी जाती है। गांवों में यह माल बाइक, ऑटो और ई-रिक्शा से डीलरों तक पहुंचता है।
अपराध के दलदल की पहली सीढ़ी
एसपी अभिनंदन के मुताबिक पिछले महीनों में पुलिस ने जिन भी छोटे अपराधों में युवाओं को पकड़ा, उनमें से करीब 30-40 प्रतिशत किसी न किसी नशे से जुड़े पाए गए। कोडीन के कारण चिड़चिड़ापन और आक्रामकता बढ़ने के मामले भी चिकित्सक पुष्टि करते हैं। पुलिस के अधिकारियों का कहना है कि कोडीन की बिक्री में लाइसेंसधारी दुकानों की भूमिका सबसे बड़ा सवाल है। एक भी बोतल अगर बिना प्रिस्क्रिप्शन के बेची जाती है, तो वह सीधा एनडीपीएस एक्ट का उल्लंघन है।
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कोडीन क्या है
- अफीम से निकला नारकोटिक तत्व है जो खांसी-दर्द कम करता है, पर जल्दी लत लगती है।
-100 एमएल सिरप में 10 एमजी से अधिक कोडीन संवेदनशील श्रेणी में मानी जाती है।
कोट
पिछले दिनों भारी मात्रा में अवैध सिरप आदि बरामद किए गए थे। पुरानी बस्ती थाने में केस दर्ज कर पुलिस जांच कर रही है। अन्य स्टॉकिस्ट की जांच भी की जाएगी। इस तरह के अवैध धंधे पर लगाम लगाई जाएगी।
- अरविंद कुमार, औषधि निरीक्षक