इस मामले की छानबीन कर रही पुलिस को पता चला कि इस खुदकुशी की कहानी के पीछे सामूहिक दुष्कर्म के अलावा हाल में ही बेची गई जमीन का मसला भी जुड़ा हुआ है। इस दिशा में पुलिस ने केस से अलग हटकर जांच शुरू की तो पाया गया कि नौ अगस्त को मृतक के पिता से 60 वर्ग मीटर जमीन का शिक्षक दंपती ने बैनामा कराया था। रजिस्ट्री के दस्तावेज में 09.90 लाख रुपये मालियत की जमीन को पांच लाख रुपये में क्रय करने की बात दर्ज है।
पुलिस ने जांच किया तो पता चला कि वह पांच लाख रुपये विक्रेता के बेटे यानी मृतक के एसबीआई खाते में जमा है। इस जमीन का बैनामा कराने वाले शिक्षक दंपती से भी पुलिस विस्तार से जानकारी लेने का प्रयास कर रही है। केस की तफ्तीश कर रहे एसएचओ दिनेश चंद्र चौधरी ने बताया कि शिक्षक दंपती को इसके बारे में जानकारी लेने के लिए बुलाया गया था, मगर वे अभी उपलब्ध नहीं हो सके हैं।
पुलिस मानकर चल रही है कि इस केस का जमीन के सौदे से कोई संबंध नहीं है। बावजूद इसके वह बिचौलिए की करतूत को उजागर करने के लिए दूध का दूध और पानी का पानी अलग करना चाहती है। कारण यह है कि गिरफ्तार होने के बाद पूछताछ में बिचौलिए ने अपने ऊपर लगाए गए दुष्कर्म के आरोप से इन्कार किया था, मगर जमीन बेचवाने की बात को उसने कबूल किया था। उधर, मृतक के परिवार के लोग भी चाहते हैं कि जमीन के मसले को इस केस में न खींचा जाए।