बस्ती। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ की चुनावी सभा में तमाम ऐसे चेहरे नजर आए जो अपनी ही पार्टी के प्रत्याशी को परास्त करने में लगे हैं। इनकी पहचान के बावजूद नेतृत्व व प्रत्याशी चुप्पी साधे हैं। अभी वह विवाद की स्थिति पैदा नहीं करना चाहते। हालांकि इसकी भनक नेतृत्व को भी लग गई है, मगर चुनावी मौसम में कार्रवाई से बच रहे हैं। इसी की परिणति 4 मई को भाजपा की बैठक में भी नजर आई। आरोपों-प्रत्यारोपों के बीच धक्कामुक्की की स्थिति उत्पन्न हो गई।
निकाय चुनाव में सभी दलों के भितरघाती अपने प्रत्याशी को नुकसान पहुंचाने में जुटे हैं। कोई यह कहते हुए विरोध में जुटा है कि उसने वर्षों तक पार्टी की सेवा की, मगर ऐन वक्त पर पार्टी ने उसे टिकट नहीं दिया। यही नहीं, कई तो ऐसे चेहरे भी हैं जो चुनावी मौसम में ही निकलते हैं। पार्टी के लिए वे कुछ भी करें, मगर जनता के बीच उनकी कोई पहचान नहीं है। भाजपा हो या सपा अथवा बसपा और कांग्रेस सभी में आपसी खींचतान ने पार्टी को नुकसान ही पहुंचाया है।
बात भाजपा से ही शुरू करते हैं। निकाय चुनाव में तकरीबन एक दर्जन लोग टिकट मांग रहे थे। सभी पार्टी के कार्यकर्ता थे और लंबे समय से पार्टी का झंडा ढो रहे थे। इस बीच नए चेहरे भी शामिल होकर टिकट की लाइन में लगे, मगर नेतृत्व ने साफ कर दिया था कि वह नगर पालिका में कार्यकर्ता को ही टिकट देगा। हुआ भी वही, 32 वर्ष से संगठन व पार्टी के साथ खड़े कार्यकर्ता को टिकट मिला। सपा में भी लाइन थी, मगर पार्टी नेतृत्व ने नए चेहरे पर दांव लगा दिया। कुछ लोगों ने आवाज उठाई, मगर नेतृत्व के फैसले के सामने सभी ने चुप्पी साध ली। बसपा ओर कांग्रेस ने भी पुराने कार्यकर्ता को टिकट दिया। यहां कोई आवाज नहीं उठी, मगर पार्टी के तमाम लोग दबी जुबान विरोध जुटे हैं।