घटना के बाद मृतक नूर आलम उर्फ सोनू के रोते-बिलखते परिजन।-संवाद
नगर बाजार। नगर थाना क्षेत्र के घोईसापुर गांव निवासी शहाबुद्दीन, मो. शरीफ और नूर आलम गहरे दोस्त थे। शनिवार को तीनों एक ही मोटरसाइकिल पर सवार होकर टांडा नदी में आई बाढ़ देखने निकले थे। कुछ देर बाद हादसे की खबर ने पूरे गांव को झकझोर दिया। जिस सफर पर तीनों दोस्त साथ निकले थे, वह जिंदगी का आखिरी सफर साबित हुआ। एक साथ तीन युवकों की मौत से गांव में मातम है और तीनों परिवारों में कोहराम मचा है।
मृतक शहाबुद्दीन परिवार में सबसे छोटा था। उसके बड़े भाई अजमुद्दीन, शमसुद्दीन, शर्फुद्दीन और हबीब अहमद हैं। भाई शमसुद्दीन शनिवार को ही मुंबई पहुंचा था। वहां पहुंचते ही उसे छोटे भाई की मौत की खबर मिली। तीन वर्ष पहले शहाबुद्दीन की शादी हुई थी। पत्नी उम्मतुन निशा का रो-रोकर बुरा हाल है। उसका दो वर्षीय बेटा हुमैद घर में जुटे लोगों को मासूम निगाहों से देख रहा है। उसे अभी यह भी नहीं पता कि उसके सिर से हमेशा के लिए पिता का साया उठ गया है।
मो. शरीफ मुंबई में कपड़ों पर कढ़ाई का काम करता था और इसी से परिवार का भरण-पोषण करता था। करीब एक माह पहले ही वह पत्नी शकीला खातून के उपचार के लिए घर आया था। बेटे की मौत की खबर सुनकर मां तजीबुन्निशा बेसुध हैं। पिता की पहले ही मौत हो चुकी है। बड़ा भाई मो. नजीर मुंबई में रहता है।
वहीं तीसरा मृतक नूर आलम ओडिशा में रहकर काम करता था और दो माह पहले ही घर आया था। बेटे की मौत से पिता इश्तियाक अहमद और मां शाहजहां परेशान हैं। उसका भाई सलमान दुबई में रहता है। बहन आफरीन शादीशुदा है, जबकि दूसरी बहन परवीन घर पर ही रहती है।
तीनों दोस्तों की एक साथ मौत से डकहा गांव सहित पूरे क्षेत्र में शोक व्याप्त है। परिजनों के आंसू नहीं थम रहे हैं। ग्रामीणों ने पीड़ित परिवारों को आर्थिक सहायता देने और सड़क पर तेज रफ्तार वाहनों पर अंकुश लगाने की मांग की है। पुलिस ने तीनों शवों को पोस्टमार्टम के लिए भेज दिया है और हादसे की जांच में जुटी है।