बस्ती। आय से अधिक संपत्ति के मामले में एंटी करप्शन टीम की कार्रवाई की जद में आए एसआई विजय प्रताप यादव पर भ्रष्टाचार का यह पहला आरोप नहीं है। करीब छह साल पहले वर्ष 2020 में लालगंज थाने में तैनाती के दौरान भी वह 40 हजार रुपये की रिश्वत लेते हुए एंटी करप्शन टीम के हत्थे चढ़ चुका है।
जुलाई 2020 को लालगंज थाना क्षेत्र के बानपुर निवासी धर्मेंद्र चौधरी का शव घर में पंखे से लटका मिला था। परिजनों ने भूमि विवाद को लेकर गांव के ही पांच लोगों पर आत्महत्या के लिए उकसाने का आरोप लगाया था।
विवेचना के दाैरान एसआई विजय प्रताप यादव ने उमेश चौधरी का नाम मुकदमे से निकालने के लिए रुपये मांगे। इसके बाद 40 हजार रुपये और देने की बात तय हुई। इसी बीच उमेश ने गोरखपुर एंटी करप्शन टीम से शिकायत कर दी।
शिकायत के बाद टीम ने बनकटी ब्लॉक मुख्यालय के पास स्थित एक किराये के मकान में जाल बिछाया। तय योजना के मुताबिक उमेश दरोगा को रुपये देने पहुंचा।
जैसे ही विजय प्रताप यादव ने 40 हजार रुपये लिए, पहले से मौजूद एंटी करप्शन टीम ने उसे रंगेहाथ गिरफ्तार कर लिया। मामले में उसके खिलाफ प्राथमिकी दर्ज की गई थी और तत्कालीन पुलिस अधीक्षक ने उसे निलंबित भी किया था।