बस्ती। बढ़नी में सात दिवसीय संगीतमय श्रीमद्भागवत कथा का मंगलवार को समापन हुआ। अंतिम दिन कथा वाचक आचार्य कृष्णमणि त्रिपाठी ने भगवान श्रीकृष्ण और सुदामा की मित्रता का भावपूर्ण वर्णन किया। उन्होंने कहा कि सुदामा को सामान्यतः गरीब या दरिद्र कहा जाता है, किंतु वास्तव में वे परम भक्त, ज्ञानी और संतोषी ब्राह्मण थे। वे प्रतिदिन केवल पाँच घरों से ही भिक्षा लेते थे, मिले या न मिले, उसी में संतुष्ट रहते थे।
आचार्य जी ने समझाया कि सच्ची मित्रता कैसी होती है, यह श्रीकृष्ण और सुदामा के संबंध से सीखा जा सकता है। सुदामा जब अपनी पत्नी के आग्रह पर द्वारका अपने मित्र श्रीकृष्ण से मिलने पहुँचे, तो द्वारपाल ने जाकर भगवान को सूचना दी कि उनके मित्र सुदामा आए हैं। यह सुनते ही भगवान श्रीकृष्ण “सुदामा-सुदामा” कहते हुए दौड़ पड़े, उन्हें गले से लगाया, उनके चरण धोए और उन्हें अपने प्रेम एवं कृपा से समृद्ध कर दिया।
कथा स्थल पर श्रद्धालुओं की बड़ी संख्या उपस्थित रही। प्रमुख रूप से चंद्र प्रकाश मिश्र सपत्नीक, पंकज मिश्र, स्कंद मिश्र, मानिक चंद्र मिश्र, प्रेम चंद्र मिश्र, ओम प्रकाश मिश्र, धर्मेंद्र मिश्र, धीरेन्द्र मिश्र तथा अन्य ग्रामवासी और मित्रगण उपस्थित रहे। संवाद