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Basti News: मुख्यालय से उजड़ गया अग्निशमन केंद्र घटना के समय हर्रैया से दौड़ रहे वाहन

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हर्रैया तहसील में बना फायर स्टेशन। संवाद
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बस्ती। भगवान न करें कभी ऐसा हो लेकिन, यदि जनपद में भीषण अग्निकांड हुआ तो स्थिति संभालना कठिन हो जाएगा। मुख्यालय से अग्निशमन केंद्र उजड़े हुए चार साल हो गए। नया भवन तैयार करने का जुगत नहीं बन पाया।
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जिला अग्निशमन केंद्र अब तहसील स्तरीय कार्यालय हर्रैया से संचालित हो रहा है। इससे तत्काल आग की घटनाओं पर काबू पाना मुश्किल हो रहा है। बता दें कि विभाग के पास अग्निकांड के समय जिले भर में दौड़ाने के लिए छोटे-बड़े मिलाकर महज सात वाहन हैं।
यह संसाधन जिले के 3350 गांव, दस नगर पंचायत और एक नगर पालिका क्षेत्र में रहने 30 लाख की आबादी को अग्निकांड जैसे हादसों से सुरक्षित करने के लिए नाकाफी है। शुष्क मौसम होते ही जिले में आजकल चौतरफा आगजनी की घटनाएं आम हो गई है। इससे बचाव के लिए 100 नंबर पर सूचना प्रसारित होने पर गिनती की दमकल गाड़ियों को मुख्यालय के बजाय हर्रैया से दौड़ाया जा रहा है।
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इससे काफी देर हो रही है, तब तक बहुत कुछ नुकसान हो जा रहा है। जिला मुख्यालय से लेकर तहसील मुख्यालयों तक विभाग के पास पर्याप्त संसाधन नहीं है। दमकल वाहनों की कमी भी बरकरार है। ब्लॉक स्तर पर अग्निशमन केंद्र खोलने की योजना तो अभी धरातल पर ही नहीं उतरी है। एक साथ दो से तीन जगहों पर आगजनी की घटना सामने आने के बाद विभाग हांफने लग रहा है।
सुदूरवर्ती क्षेत्रों में दमकल वाहन पहुंचने में दो से तीन घंटों की देरी हो रही है। इस सीजन में अभी तक पांच हजार बीघे से अधिक गेहूं की फसल आग की भेंट चढ़ चुकी है। वहीं एक दर्जन से अधिक रिहायशी झोपड़ियां और एक दर्जन जानवर भी आगजनी की घटना में जल चुके हैं। बावजूद इसके जरूरत के हिसाब से विभाग के पास पर्याप्त संसाधन नहीं है। विभाग भी एक साथ कई जगहों पर आग लगने के दौरान लाचार हो जा रहा है।
ब्लॉकों में नहीं मिली अभी जमीन
ब्लॉक स्तर पर अग्निशमन केंद्र खोलने की पहल फाइलों में ही कैद होकर रह गई। अभी तक जिले चौदह में से किसी भी ब्लॉक क्षेत्र इसके लिए जमीन ही उपलब्ध नहीं हो सकी है। ऐसे में आगजनी की घटनाएं होने पर संबंधित तहसील या हर्रैया में संचालित जिला स्तरीय अस्थायी कार्यालय से दमकल भेजने की व्यवस्था की जा रही है। यदि शासन की मंशा के अनुरूप ब्लॉक स्तर पर यह केंद्र खुले होते तो जिले के सभी गांवों में आगजनी के समय फौरन दमकल पहुंचाना आसान हो जाता। मगर यह व्यवस्था नहीं बनने के कारण विभाग के सामने समस्याएं बढ़ गई है।
बहुमंजिला इमारतों में अग्निकांड से बचाव के संसाधन नहीं : मंडल मुख्यालय समेत हर्रैया एवं अन्य कस्बों में इधर डेढ़ दशक के भीतर छोटे-बड़े माल, बहुमंजिला काॅमर्शियल इमारतों की संख्या में बेतहाशा वृद्धि हुई है। विभाग के अनुसार जिले में सौ से अधिक पांच मंजिला भवन की एनओसी जारी की जा चुकी है। सदर कोतवाली में एक नौ मंजिला सरकारी आवासीय भवन का निर्माण हो चुका है। इन ऊंची इमारतों में आग लगने के दौरान विभाग के पास नीचे ऊपर तक पानी की बौछार पहुंचाने के लिए संसाधन नहीं है। इसके लिए फायर ब्रिगेड को हाइड्रोलिक प्लेटफार्म की आवश्यकता होती है। अभी तक विभाग के पास एक भी हाइड्रोलिक युक्त दमकल वाहन नहीं है।
स्टॉफ की कमी से भी हो रही परेशानी : अग्निशमन विभाग में स्टॉफ की कमी पिछले एक दशक से बनी हुई है। यहां मुख्य अग्निशमन अधिकारी के एक पद पर तैनाती है।
इसके अलावा अलावा एफएसओ के सभी चार पद खाली है। हेड कांस्टेबल के नौ में से केवल तीन तैनात है। चालक के नौ पद में से चार रिक्त है। फायर मैन के 69 में से 58 तैनात हैं, 11 पद रिक्त है।
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