बस्ती। यदि आप इस गलतफहमी में हैं कि फर्स्ट रेफरल यूनिट (एफआरयू) में इलाज की मुकम्मल व्यवस्था है तो यह आपकी बड़ी चूक हो सकती है। गंभीर स्थिति में गर्भवती महिला को लेकर यहां मत आइए। सच मानिए, केवल आपका समय बर्बाद होगा। सूत्रों की माने तो इन सेंटरों में ऑपरेशन कागजी हो रहे हैं। इससे गंभीर गर्भवती को तत्काल राहत नहीं पहुंचाई जा सकती है। ऐसे मरीजों को यहां से सिर्फ रेफर किया जा रहा है।
विभाग के अनुसार, मरीजों की बड़ी संख्या को देखते हुए जिले की 14 सीएचसी में से तीन सीएचसी को एफआरयू (फास्ट रेफरल यूनिट) में तब्दील किया था, लेकिन यहां मानक के अनुसार अब तक सुविधाएं मुहैया नहीं हो पाईं हैं। न तो नियमित तौर पर चिकित्सकों की नियुक्ति हो पाई और न ही अन्य कर्मचारियों की। जिनकी ड्यूटी आसपास के अस्पतालों से लगाई भी गई है वह या तो बीमार हो जा रहे या छुट्टी लेकर चले जा रहे हैं। इससे ऑपरेशन से प्रसव कराया जाना संभव नहीं हो पा रहा है। मरीज आकर परेशान होते हैं और फिर जिला मुख्यालय की ओर रुख करता है। कभी-कभी मरीज माफिया भी इसका फायदा उठाकर निजी अस्पताल पहुंचाकर गर्भवती महिलाओं का ऑपरेशन करवाकर कमीशन कमा लेते हैं।
फिलहाल एफआरयू सिर्फ कागजों में चल रहा है। सीएचसी को एफआरयू में तब्दील किए जाने के बाद लोगों में उम्मीद जगी थी कि उन्हें बेहतर सुविधाएं मिलेंगी, लेकिन कागजी कार्रवाई के आगे प्रक्रिया नहीं बढ़ी।
सीएचसी जैसी थी, वैसी ही अब भी चल रही है। यहां कागजों में सर्जन और विशेषज्ञ हैं मगर हकीकत में वह नहीं दिखते। अगर रात में गर्भवती महिलाएं सीएचसी पहुंचती और उसका ऑपरेशन होना हो तो उसे यहां से रेफर करने के अलावा कोई विकल्प नहीं होता है। एफआरयू के जिम्मेदारों ने कागजों में ऑपरेशन दिखाकर एफआरयू को क्रियाशील बनाए हुए हैं, जबकि हकीकत अलग है। एफआरयू हर्रैया की बात करें तो यहां डॉ. एलिना द्विवेदी स्त्री रोग विशेषज्ञ के रूप में हैं। डॉ. पूनम गंगवार भी सेवा दे रही हैं। बताते हैं कि एनेस्थीसिया के रूप में डॉ. बृजेश शुक्ल यहां तैनात थे, जो अब जिला मुख्यालय पर डिप्टी सीएमओ की भूमिका में हैं। विभाग का दावा है कि एफआरयू में ऑपरेशन से प्रसव कराए जाते हैं। जरूरत पड़ने पर डॉक्टर को ऑन कॉल बुलाया जाता है। रुधौली सीएचसी में भी कागजी ऑपरेशन से प्रसव : रुधौली। सीएचसी रुधौली को जब एफआरयू बनाया गया तो यहां स्त्री रोग विशेषज्ञ, सर्जन और एनेस्थीसिया में डॉ. प्रदीप गुप्ता की ड्यूटी लगाई गई है। गायनी डॉ. अमरजीत को सीएचसी गौर से यहां अटैच किया गया है, मगर वह छुट्टी पर चल रहे हैं। इससे ऑपरेशन प्रसव नहीं हो रहा है। जिम्मेदारों ने बताया कि जरूरत पड़ने पर जिले और आसपास में तैनात विशेषज्ञ को ऑन कॉल बुलाकर ऑपरेशन कराया जाता है। गंभीर मरीज को रेफर कर दिया जाता है। अधीक्षक डॉ. आनंद मिश्रा का कहना है कि आवश्यकता पड़ने पर सीजर की सुविधा दी जाती है। नॉर्मल प्रसव कराए जा रहे हैं।