कलवारी थाना क्षेत्र के मुरादपुर निवासी प्रेमा देवी सात माह की गर्भवती थी। प्रसव पीड़ा होने पर सोमवार शाम को पति नीरज कुमार उसे लेकर सीएचसी कुदरहा बनहरा पहुंचे। आरोप है कि गर्भवती को महिला स्टाफ ने तुरंत दर्द का इंजेक्शन दे दिया।
सात माह की गर्भवती को रेफर करने के बजाय जबरन नॉर्मल प्रसव कराने का प्रयास किया। आरोप है कि डिलीवरी के दौरान स्टाफ नर्स ने नवजात के धड़ को इतनी तेज खींचा कि उसका सिर अलग हो गया। धड़ बाहर निकल गया और सिर गर्भाशय में ही फंसा रहा।
यह देख महिला स्टाफ के होश उड़ गए। हालत गंभीर बताते हुए उसे बगल के ही एक निजी अस्पताल में भेज दिया। वहां से चिकित्सक ने मेडिकल काॅलेज रेफर कर दिया। वहां ऑपरेशन कर गर्भाशय से सिर निकाला गया। मेडिकल कॉलेज की असिस्टेंट प्रोफेसर डाॅ. कल्पना मिश्रा ने बताया कि ऑपरेशन करके बच्चे का सिर निकाला गया। मरीज पूरी तरह अब सुरक्षित है।
कोख में ही उजड़ गई ममता
मां बनने का सपना लेकर अस्पताल पहुंची प्रेमा देवी के लिए यह दिन जिंदगी का सबसे बड़ा दर्द बन गया। सात महीने की गर्भवती प्रेमा प्रसव पीड़ा में कराहते हुए सीएचसी कुदरहा पहुंची थी लेकिन कुछ ही घंटों में उसकी दुनिया उजड़ गई। मां की कोख में ही मासूम की जिंदगी खत्म हो गई।
घटना गंभीर है। इसकी जांच कराई जाएगी। लापरवाही बरतने वालों पर कार्रवाई होगी। ऐसे केस में हॉयर सेंटर रेफर करना होता है। कैसे चूक हुई, इस बारे में जानकारी ली जाएगी: डाॅ. राजीव निगम, सीएमओ, बस्ती