दुबौलिया/बस्ती। मानसून दस्तक देने को है। जिले के बंधों की हालत अभी सुधर नहीं सकी है। जगह-जगह रेनकट व रैट होल दिखाई पड़ रहे हैं। ऐसे में बाढ़ से प्रभावित गांवों में तबाही मचेगी। वहीं, बाढ़ खंड के जिम्मेदार अभी इन सब से अनजान कागजी प्रक्रिया में ही लगे हैं।
बाढ़ खंड तैयारी के नाम पर सिर्फ खाना पूर्ति में जुटा हुआ है। गौरा-सैफाबाद तटबंध की बात करें तो यह भी संवेदनशील की श्रेणी में आता है। मानसून की उल्टी गिनती शुरू हो चुकी है, लेकिन टकटकवा गांव के पास दलपतपुर गांव के निकट पारा व गौरा, मटिहा गांव के सामने बांध पर बड़े-बड़े रैनकट दिखाई दे रहे हैं। रैट होल भी हैं, जिसे अभी तक भरा नहीं गया न ही दुरुस्त किया गया है। वहीं, बताया गया कि मंगलवार को डीएम तटबंध का निरीक्षण करेंगी। इसकी जानकारी हुई तो बाढ़ खंड के जिम्मेदार जागे और कुछ जगहों पर रैनकट भरवाकर कोरम पूरा कर लिया।
तटबंध के आसपास बसे गांव के ग्रामीण गोपाल, प्रमोद, इसरार, राजेंद्र कहते हैं कि बाढ़ खंड अभी नींद में है। जब नींद टूटेगी तब तक देर हो चुकी होगी। कहा कि यदि बाढ़ से पूर्व ही तटबंध को सुरक्षित कर लिया जाए तो ग्रामीण चैन की नींद सो सकते हैं। बाढ़ के समय तटबंध सुरक्षित रहे और रिसाव न होने पाए ऐसा प्रयास अभी से करना चाहिए। बाढ़ के समय रिसाव रोकने के लिए बाढ़ खंड को काफी समस्याओं का सामना करना पड़ता है। वहीं, मानसून आने से पहले ही सरयू के जलस्तर में धीरे-धीरे बढ़त भी हो रही है, जबिक अभी मैदानी भूभाग में वर्षा नहीं हो रही है लेकिन बाढ़ खंड के जिम्मेदार सतर्क नहीं हैं। गौरा-सैफाबाद तटबंध के क्षेत्र के सहायक अभियंता बाढ़ खंड, संजय शुक्ल ने बताया कि रेनकट भरने के लिए टेंडर प्रक्रिया चल रही है। जल्द ही रेनकट भरवा दिए जाएंगे। सर्वे कार्य चल रहा है।
चार माह मुश्किलों से भरा
बरसात के चार महीने दुबौलिया, विक्रमजोत व कुदरहा (आंशिक) ब्लॉक के बाढ़ प्रभावित गांवों के लोगों के लिए जीवन मुश्किलों भरा होता है। नदी का जलस्तर बढ़ने के बाद तटबंधों के आसपास रहने वालों की मुश्किलें बढ़ जाती हैं। बाढ़ के चलते तटबंध कमजोर होकर कटने लगते हैं। 2018-19 में दुबौलिया का अति संवेदनशील तटबंध कटरिया-चांदपुर पर कटते-कटते बचा था। तब चांदपुर के लोगों को विस्थापित करना पड़ गया था। तमाम परेशानियों के बाद बाढ़ खंड तटबंध बचाने में कामयाब हो पाया था।
परियोजना के तहत कराए जा रहे यह कार्य
दुबौलिया ब्लाॅक के कटरिया-चांदपुर तटबंध पर 1.885 किमी व 2.050 किमी पर दो स्पर का निर्माण, कटरिया चांदपुर पर 5.335 किमी पर क्षतिग्रस्त स्पर के पुनर्स्थापना कार्य हो रहा है। वहीं, गौरा-सैफाबाद तटबंध पर सुरक्षा के लिए 2.300 किमी व 3.600 पर दो डैंपनर एवं रिवेटमेंट निर्माण, 4.200 किमी पर एक स्पर के पुनर्स्थापना का काम लगभग पूर्ण हो चुका है। कुछ, कार्य होने बाकी हैं, ऐसे में इस बार बाढ़ प्रभावित गांवों के सामने संकट कम होने की उम्मीद है।
शासन से जो परियोजनाएं स्वीकृत हुई थीं, उसमें से अधिकांश पर कार्य पूर्ण हो चुका है। मानसून सत्र शुरू होने से पहले सभी तटबंध सुरक्षित कर लिए जाएंगे। सर्वे चल रहा है। रेनकट, रैट होल देखे जा रहे हैं। दुबौलिया क्षेत्र में टीम लगी हुई है।
- दिनेश कुमार, अधिशासी अभियंता, बाढ़ खंड