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Basti News: कागजात दुरुस्त, छतों और सड़कों पर लटके रह गए तार

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सड़क पर लटक रहे तार व खंभे।
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बस्ती। बिजली निगम के चारों डिवीजन में लाइन, ट्रांसफाॅर्मर और खंभों के मरम्मत का कार्य कागजों में पूर्ण हो चुका है। धरातल पर असलियत इसके ठीक उलट हैं। अभी भी जर्जर तारों का जाल है। कहीं-कहीं पुराने बिजली के तार ढीले होकर सड़क और छतों के नजदीक झूलते नजर आ रहे हैं। मजबूत ग्राउटिंग न होने से बिजली के लोहे और पीसीसी खंभे भी लटकते हुए दिखाई पड़ रहे हैं। इससे आमजने में हादसे का अंदेशा बना हुआ है। वहीं निगम के जिम्मेदार पेड़ों की टहनियों की कटाई- छटाई के बाद मरम्मत कार्य को पूर्ण मानकर बैठ गए हैं।
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पिछले गर्मी में भीषण बिजली कटौती और बिजली तारों की चपेट में आने से हुए हादसों के बाद ऊर्जा मंत्री सख्त हो गए थे। उनके तल्ख तेवर का असर जिले में भी देखने को मिला था। बिजली गुल होने के दौरान एक रिटायर्ड अफसर से फोन तत्कालीन एसई की अमर्यादित बोल भारी पड़ गई थी। ऑडियो वायरल होने के बाद उन्हें निलंबित कर दिया गया था।
इसके बाद अक्तूबर और नवंबर महीने में युद्ध स्तर पर लाइन, पोल, ट्रांसफार्मर, उपकेंद्रों के मरम्मत कार्य का फरमान जारी हुआ। स्थानीय स्तर पर सभी डिवीजन में इसके लिए ठेकेदार और मरम्मत टीम उतारी गई। मगर कुछ ही दिन के बाद यह अभियान ठंडा पड़ गया। शहरी क्षेत्र के कुछ फीडरों के तार, ट्रांसफाॅर्मर का मरम्मत करके बाकी जस की तस स्थिति में छोड़ दिए गए। जानकारों का कहना है कि विभाग में कार्यरत संविदा लाइनमैन और सहायकों की टीम लगाकर केवल पेड़ों की टहनिया कटवाने का कार्य हुआ है। इसके अलावा न तो जर्जर तार बदले गए हैं और न हीं खंभों और ट्रांसफार्मरों की मरम्मत हुई है। शहरी क्षेत्र में ही कई जगहों पर बिजली के नंगे तार सड़क पर लटकते हुए दिखाई पड़ रहे हैं।
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आवास विकास, कटरा, रामेश्वरपुरी, बैरियहवां, महरीखांवा, मुरलीजोत, गांवगोड़िया आदि मोहल्लों में तो लोगों के छतों के करीब झूलते नंगे तारों से बिजली की आपूर्ति की जा रही है। इन तारों पर बंदर या चिड़ियों के बैठने पर हिलने के दौरान यह आपस में सटकर स्पार्क भी करते हैं। जिससे लोकल फाल्ट की समस्या हो रही है।
गांधी नगर में लटक रहे बिजली के खंभे : शहर का गांधी नगर सबसे भीड़ भाड़ वाला क्षेत्र है। यहां सड़क के दोनों तरफ बिजली के लोहे के 12 मीटर लंबाई वाले खंभे लाइन से लगाए गए हैं। यहां अधिकांश जगहों पर 440 वोल्ट लाइन वाले तार लटकते हुए दिख रहे हैं। इसके अलावा इस मार्ग पर आधा दर्जन खंभे तारों के खिंचाव से लटक गए हैं। जिनसे खतरे की आशंका रहती है। कुछ जगहों पर लाइन क्रॉसिंग पर सड़क के ऊपर गाॅर्डिंग भी नहीं कराई गई है। ऐसे में यदि तेज हवा में तार टूट जाए तो सीधे सड़क पर आवागमन के बीच गिरेगा। इससे अनहोनी भी हो सकती है। अस्पताल चौराहा से ओपेक चिकित्सालय कैली मार्ग पर बिजली के तारों का जाल सड़क के ऊपर फैला हुआ है। यह इतना नीचे है कि डीसीएम, ट्रक जैसे वाहनों का सुरक्षित निकलना मुश्किल है।
ग्रामीण अंचलों में ट्रांसफाॅर्मरों की नहीं हुई मरम्मत : ग्रामीण अंचलों में ट्रांसफाॅर्मरों के मरम्मत का कार्य नहीं किया गया है। ग्रामीणों का कहना है कि गांवों में अधिकांश लाइन पीसीसी पोल के सहारे पहुंचाई गई है। इन पोलों की ग्रॉउटिंग न होने के कारण साल-दो साल के भीतर ही यह लटक गए हैं। जिससे तार भी ढीले होकर झूलने लगे हैं। पक्षियों के बैठने पर यह हिलकर आपस में टकरा जाते हैं। इसकी वजह से आपूर्ति अक्सर बाधित होती है।
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