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Basti News: तीन आयुर्वेदिक अस्पतालों के निर्माण में फंसा निचली जमीन का पेच

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बस्ती। जिले में तीन आयुर्वेदिक अस्पतालों के भवन के निर्माण में पेंच फंस गया है। कार्यदायी संस्था ने भवन के लिए चिह्नित भूमि पर निर्माण कराने से हाथ खड़े कर दिया है। अधिकारियों का कहना है कि कहीं जमीन को लेकर विवाद है तो कहीं लो-लैंड होने से निर्माण का खर्च काफी बढ़ जा रहा है। इस कारण अब फिर से भूमि की तलाश की जा रही है।
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क्षेत्रीय आयुर्वेदिक एवं यूनानी अधिकारी डॉ. जगदीश यादव ने बताया कि तीन अस्पतालों के लिए नई भूमि की तलाश की जा रही है। जिले में छह आयुर्वेदिक अस्पतालों के भवन बनाने की स्वीकृति शासन की ओर से की गई है। प्रत्येक भवन के निर्माण पर 29.94 लाख रुपये के हिसाब से 1.79 करोड़ रुपये खर्च होंगे। निर्माण की जिम्मेदारी यूपी प्रोजेक्ट्स कॉरपोरेशन लिमिटेड को सौंपी गई है। पहले चरण में प्रति अस्पतालों के लिए 14.97 लाख रुपये के हिसाब से 89.82 लाख रुपये आवंटित किया गया है।
एजेंसी कर्मचारी जब निर्माण स्थल पर पहुंचे तो वहां कई तरह की समस्याएं नजर आईं। कोर्ट एरिया में चार बेड के लिए चिह्नित जमीन तक पहुंचने के लिए रास्ता ही नहीं है। लालगंज में चार बेड अस्पताल के लिए आवंटित जमीन पर निर्माण को लेकर ग्रामीणों ने विरोध कर दिया था, जबकि महसो में चिह्नित की गई भूमि काफी गहरी है। कार्यदायी संस्था के इंजीनियर का कहना है कि मिट्टी पटान कराने में ही काफी बजट खर्च जाएगा। ऐसे में कार्यदायी संस्था ने तीनों जगहों पर निर्माण कराने से इंकार कर दिया है।
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इन अस्पतालों को अपने भवन के लिए अभी कुछ और इंतजार करना होगा। वहीं, गौसपुर, जनवल और गौरा पांडेय में आयुर्वेदिक अस्पताल भवन का निर्माण लगभग पूर्ण होने के कगार पर है। जल्द ही हैंडओवर की प्रक्रिया शुरू होगी, इसके बाद इन अस्पतालों को अपना भवन मिल जाएगा।
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