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Basti News: व्यवस्था के दावे बेदम...सिलिंडर के लिए लंबी कतार

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कटरा-मूडघाट रोड ​​स्थित सहज भारत गैस सर्विस पर लगी भीड़। संवाद
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बस्ती। प्रशासन भले ही यह दावा करने से चूक नहीं रहा हो कि गैस सिलिंडर का कोई संकट नहीं है, मगर एजेंसियों पर सुबह से लगने वाली लाइन इसकी हकीकत बयां कर देती है। शनिवार को ईद है। इसके बावजूद एजेंसियों पर उपभोक्ता एक अदद सिलिंडर के लिए शनिवार को जूझते देखे गए।
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लाइन इतनी लंबी हो जा रही है कि पीछे खड़े उपभोक्ताओं की जब तक बारी आती है सिलिंडर ही खत्म हो जा रहा है। होम डिलीवरी का दावा भी बेमानी है। गैस बुक कराने वाले उपभोक्ता सिलिंडर आने की बांट जोहते ही रह जा रहे हैं। जब वे एजेंसी पर फोन करते हैं तो एक ही जवाब मिलता है, यहां आने पर ही सिलिंडर मिल पाएगा। वहां पहुंचने पर एजेंसी वालों के नखरे झेलने पड़ते हैं।
ईरान-इस्राइल के बीच शुरू हुए युद्ध के कुछ दिनों बाद ही जिले में रसोई गैस सिलिंडर का संकट खड़ा हो गया था, जो दूर होने की बात कौन कहे, बल्कि बढ़ता ही जा रहा है। जिले में 40 गैस एजेंसियां हैं। रोजाना 10 से 12 हजार सिलिंडरों की आपूर्ति हो रही है। इसके बावजूद कृत्रिम अभाव बना हुआ है। उपभोक्ताओं का आरोप है कि गैस की कालाबाजारी की जा रही है।
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किसी एजेंसी पर 975 तो किसी एजेंसी 976 रुपये की रसीद भी काटी जा रही है। कटरा-मूडघाट रोड पर स्थिति सहज भारत गैस सर्विस पर सुबह करीब 10:15 बजे लंबी लाइन लगी थी। लाइन में लगे रमेश ने बताया कि एजेंसी का ताला खुलने से पहले ही लाइन लग गई थी। वे भी लाइन में लगे थे, जब बारी आई तो सिलिंडर खत्म होने की बात कहकर अगले दिन आने के लिए कह दिया गया। वह चार दिन से एजेंसी का चक्कर एक अदद सिलिंडर के लिए लगा रहे हैं, मगर मिल नहीं पा रहा है।
स्टेशन रोड स्थित रत्नाकर गैस एजेंसी पर भी लंबी लाइन देखने को मिली। पुरानी बस्ती क्षेत्र के रहने वाले सुनील चौरसिया का कहना है कि एक सप्ताह से एजेंसी का चक्कर लगा रहे है, मगर आज-कल...आज-कल करते हुए एक सप्ताह हो गया, मगर सिलिंडर नहीं मिल पाया है। इंडक्शन पर घर में खाना बन रहा है। उन्होंने कहा कि इंडक्शन और उसके बर्तन खरीदने में भी काफी रुपये खर्च हुए हैं। मड़वानगर स्थित एजेंसी पर भी उपभोक्ताओं की लाइन लगी रही। पटेल चौक, सिविल लाइंस, मालवीय रोड, कटरा, अस्पताल चौराहा एजेंसी के सामने दोपहर बाद तक उपभोक्ताओं की लाइन देखी गई।
रेखा देवी ने बताया कि बुकिंग के बाद भी सिलिंडर घर नहीं पहुंच रहा है। जिम्मेदार झूठ में होम डिलीवरी का दावा कर रहे हैं।
फास्ट फूड के कई ठेले बंद, भट्ठी पर बन रही चाय : गैस सिलिंडर संकट ने छोटे दुकानदारों के समक्ष समस्या खड़ी कर दी है। सड़क के किनारे फास्ट फूड, चाट आदि का ठेला लगाने वालों की रोजी-रोटी भी चौपट हो गई है। सिलिंडर न मिलने से उनका कामधाम बंद है।
महिला अस्पताल के पास ठेला लगाकर पराठा, छोला चावल बेचने वाले सोहन ने बताया कि सिलिंडर मिल ही नहीं पा रहा है। शुरुआत में 15 सौ रुपये का ब्लैक सिलिंडर से किसी तरह दुकान इस उम्मीद में खोली थी कि एक-दो दिन में सिलिंडर की किल्लत दूर हो जाएगा, मगर यह तो बढ़ता ही जा रहा है। 15 सौ रुपये में सिलिंडर लेकर दुकान चलाना घाटे का सौदा साबित हो रहा था, इसलिए दुकान बंद करना पड़ा।
कुछ ऐसा ही हाल अन्य छोटे दुकानदार का है। नई बाजार निवासी प्रेम मोदनवाल घर के ही अगले हिस्से में जलपान की दुकान खोल रखे हैं। सिलिंडर न मिलने से अब यह लकड़ी की भट्ठी पर चाय आदि बना रहे हैं।
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