परशुरामपुर विकास खंड के कार्यो का भारत सरकार की जांच टीम ने भौतिक सत्यापन किया ।
परशुरामपुर क्षेत्र के पांच गांवों में विकास कार्यों की हकीकत देखने पहुंची टीम जब जमीनी सच्चाई से रूबरू हुई तो भौचक रह गई। कैथोलिया में बनी पुलिया से आगे रास्ता ही नहीं था। पुलिया के औचित्य पर अधिकारी बगले झांकने लगे। निर्माण कार्य में प्रयुक्त सामग्री की सही जानकारी नहीं दे पाने पर टीम ने नसीहत दी।
भारत सरकार की टीम की जांच के बाद ब्लॉक क्षेत्र में 2015 -16 तथा इससे पूर्व में भी कराए गए विकास कार्यों के भौतिक सत्यापन के लिए उत्तर प्रदेश ग्राम्य विकास की तकनीकी सेल की टीम मुख्य प्राविधिक परीक्षक की अगुआई में पांच गांवों में कार्यों की जमीनी हकीकत जांचने पहुंची। शिकायतकर्ता राजबहादुर पांडेय को लेकर टीम तल्हवापुर पहुंची जहां गांव की सरहद से लेकर सरदार के घर तक 260 मीटर खड़जे का कार्य पैमाइश कराने पर 282 मीटर निकला। यहां निर्माणाधीन पुलिया की फोटोग्राफी कराई गई। कैथोलिया में 2015 -16 में बनाई गई पुलिया की जांच के दौरान टीम उस समय असहज हो गई जब पुलिया के बाद रास्ता ही बंद था। टीम का सवाल था कि ऐसी जगह पुलिया क्यों बनाई गई जहां रास्ता न हो।
बीडीओ श्याम जी जवाब के बजाय बगले झांकने लगे। पुलिया निर्माण में आरसीसी के ऊपर प्लास्टर किया गया था। प्रयुक्त सरिया के बारे में मीटर गेज पूछे जाने पर जेई आरएस बीपी मिश्रा ने कुंतल में जवाब दिया। दोनों सही जवाब न देने पर जांच अधिकारी ने फटकार लगाई। इसके बाद टीम सुकरौली कुवर पहुंची जहां वर्ष सौ-सौ मीटर के तीन भागों में इंटरलॉकिंग का कार्य कराया गया था। गांव के लोगों ने बताया कि यह कार्य दो दिन पूर्व ही कराया गया है और जब टीम आगे बढी तो अंतिम छोर में 50 मीटर का कार्य कराते देखा। निर्माणाधीन कार्य की फोटो कराई गई।
खड़वा कुवंर गांव में 2015-16 में कराए गए खड़वाकुवंर पक्की सड़क से सुकरौली दर्रूपुर मार्ग तक के खडंजा निर्माण की जांच की। लंबाई 260 मीटर की जगह 317 मीटर निकली। इस बाबत बीडीओ का तर्क था कि चौड़ाई हर जगह पर्याप्त नहीं मिल पाई जिससे खडंजे की लंबाई बढ़ाकर निर्माण पूरा किया गया। इसके बाद जांच टीम पड़री बाबू पहुंची जन्हा प्राथमिक विद्यालय से लेकर जगदम्बा सिंह के घर तक 100 मीटर इंटरलॉकिंग की जांच में किनारों पर घटिया मसाले के प्रयोग पर नाराजगी जताई। बारिश की वजह से जांच टीम ब्लॉक मुख्यालय वापस चली गई।