संवाद न्यूज एजेंसी
बस्ती। शादी समारोह में डीजे की धुन पर थिरकने का युवाओं का शौक परेशानी का सबब बन गया है। इस पर रोक लगाने का आदेश भी कोई मानने वाला नहीं है। सामाजिक, मांगलिक कार्य में विघ्न न डालने के संकोच के कारण पुलिस प्रशासन भी ज्यादा सख्ती करते नहीं दिख रही है। रात एक बजे तक डीजे बज रहे हैं। इससे बीमार व बुजुर्गों की तकलीफ बढ़ रही है।
आलम यह है कि उच्च आवृत्ति के स्पीकर सड़क पर बज रहे हैं, तो आसपास के घरों की खिड़कियां और दरवाजे तक हिल रहे हैं। इसकी ध्वनि सीधे आने पर कान के परदे भी कंपन करने लगते हैं। यह तीव्र ध्वनि कमजोर दिल के लोगों की जान पर भी बन आती है। इसीलिए शासन ने उच्च आवृत्ति में डीजे बजाने पर प्रतिबंध लगा दिया है। मगर, इसका पालन अभी सुनिश्चित नहीं हो पा रहा है। कांवड़ यात्रा और गणेश पूजा के दौरान 50 से अधिक डीजे संचालकों पर एफआईआर दर्ज की गई थी। मगर, शादियों में बजने वाले डीजे पर कोई रोकटोक नहीं है। नतीजा यह है कि शादियों के आयोजन में फुल वैल्यूम में बज रहे डीजे से एक ओर लोगों की नींद हराम हो गई है। दूसरी ओर परीक्षा के समय में विद्यार्थी एकाग्र होकर पढ़ाई नहीं कर पा रहे हैं। अनिद्रा से चिढ़चिढ़ापन, बेचैनी से लोग ग्रसित हो रहे हैं।
एकाग्रता हो जाती है नष्ट : जिला चिकित्सालय के चिकित्सक डाॅ. रामजी सोनी ने बताया कि तेज आवाज के कारण कार्यक्षमता घटती है और एकाग्रता नष्ट हो जाती है। गर्भपात की शिकायत बढ़ती है तथा मानसिक रूप से दिव्यांग बच्चे पैदा हो सकते हैं।
आंखों में जल्द चश्मा तथा एकाग्रता की कमी इसकी प्रमुख वजह है। ज्यादा देर तक लगातार शोर होता रहे तो बहरेपन के साथ हृदयघात का खतरा होता है। तेज आवाज के चलते हृदय के करंट का कंडंशन कम हो जाता है। ऐसे में शरीर के किसी भी हिस्से में रक्त जमा होगा तो वह हृदयगति को रोक देगा, जिससे मौत हो सकती है।
मेडिकल कॉलेज के चिकित्सक डॉ. रजत पांडेय की मानें तो हमारे घर में दिन के समय अधिकतम 25 से 30 तथा रात में 20 से 25 डेसीबल तक ध्वनि होनी चाहिए, लेकिन, वाहनों के प्रेशर हॉर्न तथा मशीनों की आवाज से भी ध्वनि प्रदूषण की तीव्रता बढ़ जाती है। ऐसे में डीजे की तीव्र ध्वनि के पास खड़े रहना सेहत के लिए भयानक खतरा पैदा करता है।