बस्ती। परिषदीय स्कूलों में कार्यरत शिक्षकों को टीईटी पास करने की अनिवार्यता के विरोध में जिले के शिक्षकों ने बृहस्पतिवार को बीएसए कार्यालय परिसर में धरना देकर पैदल मार्च करते हुए डीएम कार्यालय पहुंचकर प्रधानमंत्री को संबोधित ज्ञापन डीएम को सौंपा। टीचर्स फेडरेशन ऑफ इंडिया के नेतृत्व में सभी संगठनों ने एक साथ मिलकर टीईटी पास करने की अनिवार्यता से मुक्त कराने की मांग की।
शिक्षकों का कहना था कि एक सितंबर 2025 को सर्वोच्च न्यायालय ने केंद्र सरकार के 2017 के शासनादेश के क्रम में सेवारत शिक्षकों के लिए भी टीईटी उत्तीर्ण करना अनिवार्य कर दिया है। जबकि सभी शिक्षक नियुक्ति के समय निर्धारित मानकों को पूरा कर ही सेवा में आए थे। सरकार का यह निर्णय न सिर्फ अन्यायपूर्ण है, बल्कि लाखों परिवारों के भविष्य पर संकट खड़ा हो गया है।
धरने को संबोधित करते हुए उत्तर प्रदेशीय प्राथमिक शिक्षक संघ के जिलाध्यक्ष चंद्रिका सिंह ने कहा कि शिक्षकों पर जबरन टीईटी अनिवार्यता की जा रही है। शिक्षकों ने नियुक्ति के सभी मानक पूर्ण किए थे, आज सरकार की गलत नीतियों के कारण शिक्षक हाशिये पर हैं। जिला मंत्री बालकृष्ण ओझा, कोषाध्यक्ष दुर्गेश यादव, रवीश मिश्र ने कहा कि सरकार की उदासीनता को देखते हुए शिक्षकों ने दिल्ली में धरने के लिए रणनीति बनाई है।
धरने को शिव रतन, उमाकांत शुक्ल, राजकुमार तिवारी, अविनाश दूबे, राजेश गिरी, अशोक यादव, विवेक कांत पांडेय, सनद पटेल, अटल उपाध्याय, प्रमोद सिंह, बब्बन पांडेय, रामसागर वर्मा, विवेक सिंह, संतोष पांडेय, हरिओम यादव, अखिलेश पांडेय, बृजेश त्रिपाठी, हरेंद्र यादव, सत्य प्रकाश, राम प्यारे आदि ने संबोधित किया।