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Basti News: कागज में सप्लाई, धरातल पर पेयजल संकट से जूझ रही ग्रामीण आबादी

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अर्धनिर्मित पानी की टंकी।
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नगर बाजार (बस्ती)। जलजीवन मिशन के तहत हर घर नल, हर घर जल अभियान का जिले में हाल बेहाल है। हालत यह है कि पाइपलाइन पेयजल परियोजना के बोर्ड पर काम एक वर्ष पहले ही पूरा दिखा दिया गया है जबकि धरातल पर कार्य अधूरा पड़ा है। तमाम स्थानों पर परियोजनाएं अधूरी है, जबकि स्थल पर लगे बोर्ड में इसका कार्य पूर्ण दिखाया गया है।
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जिले में जलजीवन मिशन के तहत 855 पाइपलाइन पेयजल परियोजनाएं स्वीकृत की गई थी। इनमें से अब तक महज 250 परियोजनाएं ही पूर्ण हो पाई हैं। जो परियोजनाएं पूर्ण हैं उनमें भी कई जगहों पर पानी की आपूर्ति अभी शुरू ही नहीं हो पाई हैं।
इनमें तो कई पेयजल परियोजनाएं ऐसी हैं जिनको पूरा हुए दो-दो वर्ष हो चुके हैं, मगर अब इनसे पेयजल की आपूर्ति शुरू नहीं की गई। सदर विकास खंड के ओठघनपुर में एक करोड़ 73 लाख 87 हजार रुपये की लागत से पेयजल परियोजना का कार्य तीन मार्च 2023 को शुरू कराया गया था। इससे करीब 400 घरों में पेयजल आपूर्ति होनी है। स्थल पर लगे बोर्ड में कार्य दो सितंबर 2024 को पूरा दिखा दिया गया है, जबकि मौके पर अभी वाटर ओवरहेड टैंक का ही निर्माण नहीं हो सका है।
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महज बाउंड्रीवाल और पंप हाउस का ही निर्माण अब तक पूरा हुआ है। यहां पेयजल आपूर्ति कितने बजे से कितने बजे तक होनी है यह दीवारों पर लिखवाया गया है। इसी प्रकार सांऊघाट के कुर्थिया ग्राम पंचायत में भी वाटर हेड टैंक का निर्माण अब तक पूरा नहीं हो पाया है, मगर संबंधित बोर्ड पर नौ अप्रैल 2024 को ही कार्य पूरा होने की तिथि लिखी है।
यह तो महज बानगी है, कमोवेश जिले के कई स्थानों पर यही हाल है। ओठघनपुर के ग्रामीणों का कहना है कि कई स्थानों पर पाइप लाइन अधूरी पड़ी है, कनेक्शन नहीं दिए गए हैं और पानी की सप्लाई अब तक शुरू नहीं हो सकी है। इसके बावजूद कार्य पूर्ण होने की तिथि पर आनन-फानन में कार्य को पूरा दिखाकर बोर्ड पर कालिख पोत दी गई है।
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इससे ग्रामीण पेयजल के लिए अलग से व्यवस्था किए हैं या फिर देसी नल और इंडिया मार्क हैंडपंप से अपनी प्यास बुझा रहे हैं।
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