बस्ती। न्यायालय सिविल जज (सी.डि.), एफटीसी के न्यायाधीश शुभम द्विवेदी की अदालत ने मुंडेरवा थाने में तैनात उपनिरीक्षक जावेद अहमद की ओर से पेश किया गया बयान झूठा पाया है। उन्होंने जिस महिला का बयान 10 मार्च 2026 को पत्रावली में शामिल किया है उसकी मौत 26 नवंबर 2024 को ही हो चुकी थी। न्यायालय ने इसे गंभीर लापरवाही मानते हुए संबंधित उपनिरीक्षक के खिलाफ कार्रवाई का आदेश पारित किया है।
न्यायाल में मुंडेरवा थाना क्षेत्र के बेहित गांव निवासी ओमप्रकाश ने सात लोगों के खिलाफ परिवाद दाखिल किया था। उनके द्वारा लगाए गए आरोपों के संबंध में न्यायालय ने 10 फरवरी 2026 को मुंडेरवा थानाध्यक्ष को जांच कराए जाने का आदेश दिया था। इसके अनुपालन में थाने में तैनात उपनिरीक्षक जावेद खान ने 10 मार्च 2026 को जांच आख्या न्यायालय में प्रस्तुत की। जिसके अवलोकन के समय पता चला कि उपनिरीक्षक द्वारा पीड़िता के रूप में वादी की पत्नी विंध्यवासिनी तथा अन्य गवाहों का बयान दर्ज करके पेश किया गया है।
इस पर विपक्षी प्रहलाद ने आपत्ति करते हुए न्यायालय को अवगत कराया कि जांच कर्ता ने बिना पड़ताल के ही थाने पर बैठकर अनुचित लाभ लेकर गवाहों का नाम पूछते हुए गलत आख्या प्रस्तुत कर दी है। आपत्तिकर्ता ने बताया कि गवाह के रूप में वादी की पत्नी विंध्यवासिनी की मृत्यु 26 नवंबर 2024 को ही हो चुकी है। प्रमाण के तौर पर उन्होंने मृतका के वरासत से संबंधित मुकदमे का साक्ष्य भी प्रस्तुत किया। इसके बाद न्यायालय ने उपनिरीक्षक की ओर से प्रस्तुत किए गए गवाहों के बयान को झूठा कराद दिया गया।