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बचकर रहिए : काटने को दौड़ रहे कुत्ते-बंदर, सौ लोगों को लग रहा इंजेक्शन

Thu, 06 Feb 2025 11:35 PM IST
गोरखपुर ब्यूरो संवाद न्यूज एजेंसी, बस्ती
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जिला अस्पताल में रोजाना सौ से डेढ़ सौ एंटी रेबीज इंजेक्शन की खपत
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संवाद न्यूज एजेंसी
बस्ती। इन दिनों कुत्तों और बंदरों के काटने और पंजा मारने के कारण इसके शिकार लोगों की संख्या में इजाफा होता जा रहा है। जिला अस्पताल की ओपीडी में रोजाना ऐसे सौ से डेढ़ सौ केस आ रहे हैं। जबकि जिले के अन्य सीएचसी व पीएचसी पर भी इस श्रेणी के रोगियों की संख्या बढ़ी है। इससे सहज ही अंदाजा लगाया जा सकता है कि कुत्तों और बंदरों का खौफ बढ़ता जा रहा है।
जिला अस्पताल में सुबह से ही कुत्तों और बंदरों के शिकार लोगों की भीड़ जुट रही है। इनमें सबसे अधिक संख्या बच्चों की रहती है। इसके पीछे कारण यह है कि ठंड में कुत्तों की प्रजनन क्रिया होती है और छोटे बच्चे इनके पिल्लो के साथ खेलते हैं। लिहाजा, वह उनके पंजों व आक्रोश के शिकार हो जाते हैं।
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वहीं जिले में हुई बंदरों की संख्या बढ़ने से उनके हमलों को भी तेज हो गए हैं। लिहाजा, पीड़ितों की संख्या बढ़ती जा रही है। जिला अस्पताल के एंटी रेबीज विभाग के प्रभारी विजय प्रकाश चतुर्वेदी के अनुसार, पिछले तीन माह में रोजाना औसतन सवा सौ केस आ रहे हैं। इनमें 25 फीसदी केस बंदरों के काटने के रहते हैं। वहीं कुत्तों के काटने या पंजा मारने के केस सबसे अधिक बच्चों के आते हैं।
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जिला अस्पताल में एंटी रेबीज का इंजेक्शन लगवाने पहुंचे नगर बाजार निवासी संतोष श्रीवास्तव ने बताया कि घर के पास छोटे-छोटे पिल्ले खेल रहे थे। बिटिया भी उनके साथ खेल रही थी। अचानक उन पिल्लों की मां ने आकर हमला बोल दिया और उसका पंजा लग गया। रुधौली से आए सत्येंद्र जायसवाल ने बताया कि उनके यहां सीएचसी पर एंटी रेबीज इंजेक्शन नहीं मिला तो जिला अस्पताल आ गए। अभी पत्नी के साथ लाइन में लगे हुए हैं। बताया कि सुबह आठ बजे से पत्नी को इंजेक्शन लगवाने का इंतजार कर रहा हूं। प्रभारी चतुर्वेदी ने बताया कि एंटी रेबीज व टिटनेस के इंजेक्शन की पर्याप्त व्यवस्था है। पंजीकरण करवाने के बाद सभी को समय से सेवाएं उपलब्ध कराई जा रही हैं।
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